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युग्म

From जैनकोष



ध. १०/४, २, ४, ३/२२/९ जुम्मं सममिदि एयट्‌ठो। तं दुविहं कद - बादरजुम्मभेएण। तत्थ जो रासी चदुहि अवहिरिज्जदि सो कदजुम्मो। जो रासी चदुहि अवहिरिज्जमाणो दोरूवग्गो होदि सो बादरजुम्मं। = युग्म और सम ये एकार्थवाचक शब्द हैं। वह कृतयुग्म और बादरयुग्म के भेद से दो प्रकार का है। उनमें से जो राशि चार से अवहृत होती है वह कृतयुग्म कहलाती है। जिस राशि को चार से अवहृत करने पर दो रूप (२) शेष रहते हैं वह बादरयुग्म कहलाती है ।

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