Actions

Difference between revisions of "तेरी शांति छवि पे मैं बलि बलि जाऊँ"

From जैनकोष

 
Line 14: Line 14:
 
[[Category:भजन]]
 
[[Category:भजन]]
 
[[Category:Bhajan]]
 
[[Category:Bhajan]]
[[Category:सौभाग्यमल जी]]
+
[[Category:सौभाग्यमलजी]]
 
[[Category:देव भक्ति ]]
 
[[Category:देव भक्ति ]]

Latest revision as of 16:43, 28 February 2008

तेरी शांति छवि पे मैं बलि बलि जाऊँ ।
खुले नयन मारग आ दिल मैं बिठाऊँ ।।
लेखा ना देखा, धर्म पाप जोड़ा,
बना भोग लिप्सा कि चाहों में दौड़ा,
सहे दुख जो जो कहा लो सुनाऊँ - तेरी शांति. ।। १ ।।
तेरा ज्ञान गौरव जो गणधर ने गाया,
वही गीत पावन मुझे आज भाया,
उसी के सुरों में सुनो मैं सुनाऊँ - तेरी शांति छवि. ।। २ ।।
जगी आत्म ज्योति सम्यक्त्व तत्त्व की,
घटी है घटा शाम मिथ्या विकल की,
निजानन्द 'सौभाग्य' सेहरा सजाऊँ-२ ।।३ ।।