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आतम जाना, मैं जाना ज्ञानसरूप

From जैनकोष

आतम जाना, मैं जाना ज्ञानसरूप
पुद्गल धर्म अधर्म गगन जम, सब जड़ मैं चिद्रूप ।।आतम. ।।१ ।।
दरब भाव नोकर्म नियारे, न्यारो आप अनूप ।।आतम. ।।२ ।।
`द्यानत' पर-परनति कब बिनसै, तब सुख विलसै भूप ।।आतम. ।।३ ।।