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आतम जान रे जान रे जान

From जैनकोष

आतम जान रे जान रे जान
जीवनकी इच्छा करै, कबहुँ न मांगै काल । (प्राणी!)
सोई जान्यो जीव है, सुख चाहै दुख टाल ।।आतम. ।।१ ।।
नैन बैनमें कौन है, कौन सुनत है बात । (प्राणी!)
देखत क्यों नहिं आपमें, जाकी चेतन जात ।।आतम. ।।२ ।।
बाहिर ढूंढ़ैं दूर है, अंतर निपट नजीक । (प्राणी!)
ढूंढनवाला कौन है, सोई जानो ठीक ।।आतम. ।।३ ।।
तीन भुवनमें देखिया, आतम सम नहिं कोय । (प्राणी!)
`द्यानत' जे अनुभव करैं, तिनकौं शिवसुख होय ।।आतम. ।।४ ।।