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आतम महबूब यार, आतम महबूब

From जैनकोष

आतम महबूब यार, आतम महबूब
देखा हमने निहार, और कुछ न खूब।।आतम. ।।
पंचिन्द्रीमाहिं रहै, पाचों तैं भिन्न ।
बादल में भानु तेज, नहीं खेद खिन्न ।।आतम. ।।१ ।।
तनमें है तजै नाहिं, चेतनता सोय ।
लाल कीच बीच पर्यो, कीचसा न होय ।।आतम. ।।२ ।।
जामें हैं गुन अनन्त, गुनमें है आप ।
दीवे में जोत जोत में है दीवा व्याप ।।आतम. ।।३ ।।
करमोंके पास वसै, करमोंसे दूर ।
कमल वारि माहिं लसै, वारि माहिं जूर ।।आतम. ।।४ ।।
सुखी दुखी होत नाहिं, सुख दुखकेमाहिं ।
दरपनमें धूप छाहिं, धाम शीत नाहिं ।।आतम. ।।५ ।।
जगके व्योहाररूप, जगसों निरलेप ।
अंबरमें गोद धर्यो, व्योमको न चेप ।।आतम. ।।६ ।।
भाजनमें नीर भर्यो, थिरमें मुख पेख ।
`द्यानत' मन के विकार, टार आप देख ।।आतम. ।।७ ।।