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आरसी देखत मन आर-सी लागी

From जैनकोष

आरसी देखत मन आर-सी लागी
सेत बाल यह दूत कालको, जोवन मृग जरा बाघिनि खागी।।आरसी. ।।१ ।।
चक्री भरत भावना भाई, चौदह रतन नवों निधि त्यागी।।आरसी.।।२ ।।
`द्यानत' दीक्षा लेत महूरत, केवलज्ञान कला घट जागी ।।आरसी.।।३ ।।