• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • ग्रन्थ
  • Discussion
  • View source
  • View history

ग्रन्थ

ग्रन्थ:मोक्षपाहुड़ गाथा 86

From जैनकोष

गहिऊण य सम्मत्तं सुणिम्मलं सुरगिरीव णियकंपं।
तं झाणे झाइज्जइ सावय दुयखयखयट्ठाए॥८६॥
गृहीत्वा च सम्ययत्वं सुनिर्मलं सुरगिरेरिव निष्कम्‍पम्‌।
तत्‌ ध्याने ध्यायते श्रावक! दु:खक्षयार्थे॥८६॥


आगे श्रावकों को पहिले यया करना, वह कहते हैं -
अर्थ - प्रथम तो श्रावकों को सुनिर्मल अर्थात्‌ भले प्रकार निर्मल और मेरुवत्‌ नि:कंप
अचल तथा चल मलिन अगा९ढ दूषणरहित अत्यंत निश्चल ऐसे सम्ययत्व को ग्रहण करके
दु:ख का क्षय करने के लिए उसको अर्थात्‌ सम्यग्दर्शन को (सम्यग्दर्शन के विषय का) ध्यान में ध्यान करना।
भावार्थ - श्रावक पहिले तो निरतिचार निश्चल सम्ययत्व को ग्रहण करके उसका ध्यान करे, इस सम्ययत्व की भावना से गृहस्थ के गृहकार्य संबंधी आकुलता, क्षोभ, दु:ख हेय है वह मिट जाता है, कार्य के बिग९डने सुधरने में वस्तु के स्वरूप का विचार आवे तब दु:ख मिटता है। सम्यग्दृष्टि के इसप्रकार विचार होता है कि वस्तु का स्वरूप सर्वज्ञ ने जैसा जाना है वैसा निरन्तर परिणमता है वही होता है, इष्ट-अनिष्ट मानकर दु:खी सुखी होना निष्फल है। ऐसा विचार करने से दु:ख मिटता है, यह प्रत्यक्ष अनुभवगोचर है इसीलिए सम्ययत्व का ध्यान करना कहा है॥८६॥


Previous Page Next Page

See Also

  • मोक्षपाहुड़ अनुक्रमणिका
  • आचार्य कुंद्कुंद
  • प. जयचंदजी छाबड़ा
Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=ग्रन्थ:मोक्षपाहुड़_गाथा_86&oldid=8082"
Category:
  • मोक्षपाहुड़
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 9 December 2013, at 21:35.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki