• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • ग्रन्थ
  • Discussion
  • View source
  • View history

ग्रन्थ

ग्रन्थ:रत्नकरंड श्रावकाचार - श्लोक 54

From जैनकोष



व्यतीचारा विविधा विरूपका वा अतीचारा दोषा: । कति ? पञ्च । कस्य ? स्थूलवधाद् व्युपरते: । कथमित्याह छेदनेत्यादि कर्णनासिकादीनामवयवानामपनयनं छेदनं, अभिमतदेशे गतिनिरोधहेतुर्बन्धनं, पीडादण्डकशाद्यभिघात:, अतिभारारोपणं न्याय्यभारादधिकभारारोपणम् । न केवलमेतच्चतुष्टयमेव किन्तु आहारवारणापि च आहारस्य अन्नपानलक्षणस्य वारणा निषेधो धारणा वा निरोध: ॥


छेदनबन्धनपीडनमतिभारारोपणं व्यतीचाराः
आहारवारणापि च स्थूलवधाद् व्युपरतेः पञ्च ॥54॥


टीका: 

व्यतीचारा विविधा विरूपका वा अतीचारा दोषा: । कति ? पञ्च । कस्य ? स्थूलवधाद् व्युपरते: । कथमित्याह छेदनेत्यादि कर्णनासिकादीनामवयवानामपनयनं छेदनं, अभिमतदेशे गतिनिरोधहेतुर्बन्धनं, पीडादण्डकशाद्यभिघात:, अतिभारारोपणं न्याय्यभारादधिकभारारोपणम् । न केवलमेतच्चतुष्टयमेव किन्तु आहारवारणापि च आहारस्य अन्नपानलक्षणस्य वारणा निषेधो धारणा वा निरोध: ॥




अहिंसा अणुव्रत के अतिचार




छेदनबन्धनपीडनमतिभारारोपणं व्यतीचाराः

आहारवारणापि च स्थूलवधाद् व्युपरतेः पञ्च ॥54॥


टीकार्थ:

'विविधा विरूपका वा अतिचारा दोषा: व्यतिचारा:' इस समास के अनुसार व्यतीचार का अर्थ है- नाना प्रकार के अथवा व्रत को विकृत करने वाले दोष । ये अतिचार-दोष पाँच हैं । दुर्भावना से नाक, कानादि अवयवों को छेदना, इच्छित स्थान पर जाने से रोकने के लिए रस्सी आदि से बाँध देना, डण्डे कोड़े आदि से पीटना, उचित भार से अधिक भार लादना तथा अन्न पानादिरूप आहार का निषेध करना अथवा थोड़ा देना -- अहिंसाणुव्रत के ये पाँच अतिचार हैं ॥५४॥



पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

रत्नकरंड श्रावकाचार अनुक्रमणिका

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=ग्रन्थ:रत्नकरंड_श्रावकाचार_-_श्लोक_54&oldid=102456"
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 2 November 2022, at 21:30.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki