ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 3 - सूत्र 20
From जैनकोष
404. यकाभिः सरिद्भिस्तानि क्षेत्राणि प्रविभक्तानि ता उच्यन्ते-
404. जिन नदियों से क्षेत्रों का विभाग हुआ है अब उन नदियों का कथन करने के लिए आगे का सूत्र कहते हैं
गङ्गासिन्धुरोहिद्रोहितास्याहरिद्धरिकान्तासीतासीतोदानारीनरकान्तासुवर्णरूप्यकूलारक्तारक्तोदाः सरितस्तन्मध्यगाः ।।20।।
इन भरत आदि क्षेत्रों में-से गंगा, सिन्धु, रोहित, रोहितास्या, हरित्, हरिकान्ता, सीता, सीतोदा, नारी, नरकान्ता, सुवर्णकूला, रूप्यकूला, रक्ता और रक्तोदा नदियाँ बही हैं ।।20।।