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जगत में सम्यक उत्तम भाई

From जैनकोष

जगतमें सम्यक उत्तम भाई
सम्यकसहित प्रधान नरकमें, धिक शठ सुरगति पाई।।जगत. ।।
श्रावक-व्रत मुनिव्रत जे पालैं, जिन आतम लवलाई ।
तिनतैं अधिक असंजमचारी, ममता बुधि अधिकाई ।।जगत. ।।१ ।।
पंच-परावर्तन तैं कीनें, बहुत बार दुखदाई ।
लख चौरासी स्वांग धरि नाच्यौ, ज्ञानकला नहिं आई ।।जगत. ।।२ ।।
सम्यक बिन तिहुँ जग दुखदाई, जहँ भावै तहँ जाई ।
`द्यानत' सम्यक आतम अनुभव, सद्गुरु सीख बताई ।।जगत. ।।३ ।।