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जम आन अचानक दावैगा

From जैनकोष

जम आन अचानक दावैगा ।।टेक ।।
छिनछिन कटत घटत थित ज्यौं जल, अंजुलिको झर जावैगा ।
जन्म तालतरूतैं पर जियफल, कोंलग बीच रहावैगा ।
क्यौं न विचार करै नर आखिर, मरन महीमें आवैगा ।।१ ।।
सोवत मृत जागत जीवत ही, श्वासा जो थिर थावैगा ।
जैसैं कोऊ छिपै सदासौं, कबहूँ अवशि पलावैगा ।।२ ।।
कहूँ कबहूँ कैसें हू कोऊ, अंतक से न बचावैगा ।
सम्यकज्ञान पियूष पिये सौं, `दौल' अमरपद पावैगा ।।३ ।।