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जे सहज होरी के खिलारी

From जैनकोष

जे सहज होरी के खिलारी, तिन जीवन की बलिहारी ।।टेक ।।
शांतभाव कुंकुम रस चन्दन, भर ममता पिचकारी ।
उड़त गुलाल निर्जरा संवर, अंबर पहरैं भारी ।।१ ।।
सम्यकदर्शनादि सँग लेकै, परम सखा सुखकारी ।
भींज रहे निज ध्यान रंगमें, सुमति सखी प्रियनारी ।।२ ।।
कर स्नान ज्ञान जलमें पुनि, विमल भये शिवचारी ।
`भागचन्द' तिन प्रति नित वंदन, भावसमेत हमारी ।।३ ।।