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तोकौं सुख नहिं होगा लोभीड़ा!

From जैनकोष

(राग काफी कनड़ी)
तोकौं सुख नहिं होगा लोभीड़ा! क्यौं भूल्या रे परभावनमें ।।तोकौं. ।।टेक ।।
किसी भाँति कहूँका धन आवै, डोलत है इन दावनमें।।१ ।।तोकौं. ।।
ब्याह करूँ सुत जस जग गावै, लग्यौ रहे या भावनमें।।२ ।।तोकौं. ।।
दरव परिनमत अपनी गौंत तू क्यों रहत उपायनमें ।।३ ।।तोकौं. ।।
सुख तो है संतोष करनमें, नाहीं चाह बढ़ावनमें ।।४ ।।तोकौं. ।।
कै सुख है बुधजनकी संगति, कै सुख शिवपद पावनमें।।५ ।।तोकौं. ।।