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धिक! धिक! जीवन समकित बिना

From जैनकोष

धिक! धिक! जीवन समकित बिना
दान शील तप व्रत श्रुतपूजा, आतम हेत न एक गिना ।।धिक. ।।
ज्यों बिनु कन्त कामिनी शोभा, अंबुज बिनु सरवर ज्यों सुना ।
जैसे बिना एकड़े बिन्दी, त्यों समकित बिन सरब गुना ।।धिक. ।।१ ।।
जैसे भूप बिना सब सेना, नीव बिना मन्दिर चुनना ।
जैसे चन्द बिहूनी रजनी, इन्हैं आदि जानो निपुना ।।धिक. ।।२ ।।
देव जिनेन्द्र, साधु गुरू, करुना, धर्मराग व्योहार भना ।
निहचै देव धरम गुरु आतम, `द्यानत' गहि मन वचन तना ।।धिक. ।।३ ।।