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पाठ

गणधरवलय स्तोत्र

From जैनकोष

नृसुर-खचर-सेव्या विश्व-श्रेष्ठर्द्धि-भूषा

विविध-गुणसमुद्रा मारमातङ्ग-सिंहाः ।

भव-जल-निधि-पोता वन्दिता मे दिशन्तु

मुनि-गण-सकला: श्रीसिद्धिदाः सदृषीन्द्रा: ॥१०॥