Actions

पाठ

भक्तामर—मुनि श्रीरसागर

From जैनकोष

तुम स्तोत्र जिनेश महान , भक्ति विवश कछु रचा अजान

पर जो पाठ पढ़े मन लाय , 'मानतुंग' अरु लक्ष्मी पाय ॥४८॥