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याज्ञिकमत

From जैनकोष



गो. जी./जी. प्र./६८/१७८/९ संसारिजीवस्य मुक्तिर्नास्ति। = संसारी जीव की कभी मुक्ति नहीं होती है, ऐसा याज्ञिक मत वाले मानते हैं।

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