Actions

युग

From जैनकोष


  1. दो कल्पों का एक युग होता है।
  2. युग का प्रारम्भ − देखें - काल / ४
  3. कृतयुग या कर्मभूमि का प्रारम्भ− देखें - काल / ४
  4. क्षेत्र का प्रमाण विशेष। अपरनाम दण्ड, मुसल, नाली − देखें - गणित / I / १ / ३
  5. काल का प्रमाण विशेष।
  6. देखें - गणित / I / १ / ४

युगध. १४/५, ६, ४१/३८/९ गरुवत्तणेण महल्लत्तणेण य जं तुरयवेसरादीहि वुब्भदि तं जुगं णाम। = जो बहुत भारी होने से और बहुत बड़े होने से घोड़ा और खच्चर आदि के द्वारा ढोया जाता है, वह युग कहलाता है।

Previous Page Next Page