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वर्णीजी-प्रवचन

वर्णीजी-प्रवचन:पुरुषार्थसिद्धिउपाय - श्लोक 72

From जैनकोष



योनिरुदंबरयुग्मं प्लक्षन्यग्रोधपिप्पलफलानि ।

त्रसजीवानां तस्मात्तेषां तद्भक्षणे हिंसा ।।72।।

पंच उदंबरफलों के भक्षण में त्रसहिंसा―ये जो ऊमर, कठूमर, गूलर, बड़, पीपल आदिक जो फल हैं जिनमें फूल तो होते नहीं और काठ ही फोड़कर पैदा होते हैं तो वे फल त्रस जीवों से भरे हैं, उनका भक्षण करने में हिंसा है और कितने ही फलों में उनके फोड़ने पर स्पष्ट दिखते हैं इस कारण उनके खाने में त्रस जीवों की हिंसा है । देखने में भी ऐसा लगता है कि हां इसमें जीव उत्पन्न होते ही रहते हैं । तो वे कठूमर जो काठ फोड़कर उत्पन्न होते हैं उनमें जो बस रहे जीव हैं उनकी तो हिंसा होती ही है, इस कारण इन कठूमरों के भक्षण में दोष है अहिंसा धर्म पालने वालों को इन फलों का भक्षण न करना चाहिए ।


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  • पुरुषार्थसिद्धिउपाय
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