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ग्रंथसम: Difference between revisions

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Revision as of 08:35, 1 September 2022 (view source)
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Latest revision as of 20:10, 9 May 2023 (view source)
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द्रव्य निक्षेप का एक भेद–देखें [[ निक्षेप_5#5.8 | निक्षेप- 5.8.7]]।
<span class="GRef"> धवला 9/4,1,54/259/7 </span><span class="PrakritText"> तित्थयरवयणविणिग्गयबीजपदं  सुत्तं। तेण सुत्तेण समं वट्टदि उप्पज्जदि त्ति गणहरदेवम्मिट्ठिदसुदणाणं  सुत्तसमं। अर्यते परिच्छिद्यते गम्यते इत्यर्थो द्वादशांगविषय:, तेण अत्थेण  समं सह वट्टदि त्ति अत्थसमं। दव्वसुदाइरिए अणवेक्खिय संजमजणिदसुदणाणावरणक्खओवसमसमुप्पण्णबारहंगसुदं  सयंबुद्धाधारमत्थसममिदि वुत्तं होदि। गणहरदेवविरइददव्वसुदं गंथो, तेण सह वट्टदि  उप्पज्जदि त्ति बोहियबुद्धाइरिएसु ट्ठिदबारहंगसुदणाणं '''गंथसमं'''। नाना मिनोतीति  नाम। अणेणेहि, पयारेहि अत्थपरिच्छित्तिं णामभेदेण कुणदि त्ति एगादिअक्खराण  बारसंगाणिओगाणं मज्झट्ठिददव्वसुदणाणवियप्पा णाममिदि वुत्तं होदि। तेण नामेण दव्वसुदेणं  समं सट्टवट्टदि उप्पज्जदि त्ति सेसाइरिएसु ट्ठिदसुदणाणं णामसमं। ...सुई मुद्दा...पंचैते...  अणिओगस्स घोससण्णो णामेगदेसेण अणिओगो वुच्चदे। सच्चभामापदेण अवगम्ममाणत्थस्स  तदेगदेसभामासद्दादो वि अवगमादो।...घोसेण दव्वाणिओगद्दारेण समं सह वट्टदि उप्पज्जदि  त्ति घोससमं णाम अणियोगसुदणाणं। </span><span class="HindiText">........ गणधरदेव से रचा गया द्रव्यश्रुत ग्रंथ कहा जाता  है। उसके साथ रहने अर्थात् उत्पन्न होने के कारण बोधितबुद्ध आचार्यों में स्थित  द्वादशांग श्रुतज्ञान '''ग्रंथसम''' कहलाता है।........</span>
 
 
<span class="HindiText">द्रव्य निक्षेप का एक भेद–देखें [[ निक्षेप_5#5.8 | निक्षेप- 5.8.7]]।</span>


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[[Category: ग]]
[[Category: ग]]
[[Category: करणानुयोग]]

Latest revision as of 20:10, 9 May 2023

धवला 9/4,1,54/259/7 तित्थयरवयणविणिग्गयबीजपदं सुत्तं। तेण सुत्तेण समं वट्टदि उप्पज्जदि त्ति गणहरदेवम्मिट्ठिदसुदणाणं सुत्तसमं। अर्यते परिच्छिद्यते गम्यते इत्यर्थो द्वादशांगविषय:, तेण अत्थेण समं सह वट्टदि त्ति अत्थसमं। दव्वसुदाइरिए अणवेक्खिय संजमजणिदसुदणाणावरणक्खओवसमसमुप्पण्णबारहंगसुदं सयंबुद्धाधारमत्थसममिदि वुत्तं होदि। गणहरदेवविरइददव्वसुदं गंथो, तेण सह वट्टदि उप्पज्जदि त्ति बोहियबुद्धाइरिएसु ट्ठिदबारहंगसुदणाणं गंथसमं। नाना मिनोतीति नाम। अणेणेहि, पयारेहि अत्थपरिच्छित्तिं णामभेदेण कुणदि त्ति एगादिअक्खराण बारसंगाणिओगाणं मज्झट्ठिददव्वसुदणाणवियप्पा णाममिदि वुत्तं होदि। तेण नामेण दव्वसुदेणं समं सट्टवट्टदि उप्पज्जदि त्ति सेसाइरिएसु ट्ठिदसुदणाणं णामसमं। ...सुई मुद्दा...पंचैते... अणिओगस्स घोससण्णो णामेगदेसेण अणिओगो वुच्चदे। सच्चभामापदेण अवगम्ममाणत्थस्स तदेगदेसभामासद्दादो वि अवगमादो।...घोसेण दव्वाणिओगद्दारेण समं सह वट्टदि उप्पज्जदि त्ति घोससमं णाम अणियोगसुदणाणं। ........ गणधरदेव से रचा गया द्रव्यश्रुत ग्रंथ कहा जाता है। उसके साथ रहने अर्थात् उत्पन्न होने के कारण बोधितबुद्ध आचार्यों में स्थित द्वादशांग श्रुतज्ञान ग्रंथसम कहलाता है।........


द्रव्य निक्षेप का एक भेद–देखें निक्षेप- 5.8.7।


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