• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

ग्रह: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 22:16, 24 December 2013 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Latest revision as of 22:20, 17 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(23 intermediate revisions by 5 users not shown)
Line 1: Line 1:
<p class="HindiText"><ol>

  <li><strong>अठासी ग्रहों का नाम निर्देश</strong><BR>       ति.प./७/१५-२२ का भाषार्थ—१. बुध; २. शुक्र; ३. वृहस्‍पति; ४. मंगल; ५. शनि; ६. काल; ७. लोहित; ८.कनक; ९. नील; १०. विकाल; ११. केश (कोश); १२. कवयव (कचयव); १३. कनक-संस्‍थान; १४. दुन्‍दुभक (दुन्‍दुभि); १५. रक्तनिभ; १६.नीलाभास; १७. अशोक संस्‍थान; १८. कंस; १९. रूपनिभ (रूपनिर्भास); २०. कंसकवर्ण (कंसवर्ण); २१. शंखपरिणाम; २२. तिलपुच्‍छ: २३. शंखवर्ण; २४. उदकवर्ण (उदय);  २५. पंचवर्ण; २६. उत्‍पात; २७. धूमकेतु; २८. तिल; २९. नभ; ३०. क्षारराशि; ३१. विजिष्‍णु (विजयिष्‍णु); ३२. सदृश; ३३. संधि (शान्ति); ३४. कलेवर; ३५. अभिन्न (अभिन्न सन्धि);  ३६. ग्रन्थि; ३७. मानवक (मान); ३८. कालक; ३९. कालकेतु; ४०. निलय; ४१. अनय; ४२. विद्युज्जिहृ;  ४३. सिंह; ४४. अलक; ४५. निर्दु:ख; ४६. काल; ४७. महाकाल; ४८. रुद्र; ४९. महारुद्र; ५०.  सन्‍तान; ५१. विपुल; ५२. संभव; ५३. स्‍वार्थी; ५४. क्षेम (क्षेमंकर); ५५. चन्‍द्र;  ५६. निर्मन्‍त्र; ५७. ज्‍यातिष्‍माण; ५८. दिशसंस्थित (दिशा); ५९. विरत (विरज); ६०. वीतशोक; ६१. निश्‍चल; ६२. प्रलम्‍ब; ६३. भासुर; ६४. स्‍वयंप्रभ; ६५. विजय; ६६. वैजयन्‍त; ६७. सीमंकर; ६८. अपराजित; ६९. जयन्‍त; ७०. विमल; ७१. अभयंकर; ७२. विकस; ७३. काष्‍ठी (करिकाष्‍ठ); ७४. विकट; ७५. कज्‍जलो; ७६. अग्निज्‍वाल; ७७. अशोक; ७८. केतु; ७९. क्षीररस;  ८०. अघ; ८१. श्रवण; ८२. जलकेतु; ८३. केतु (राहु); ८४. अंतरद; ८५. एकसंस्‍थान; ८६. अश्‍व;  ८७. भावग्रह; ८८. महाग्रह, इस प्रकार ये ८८ ग्रहों के नाम हैं।<BR><strong>नोट</strong>—ब्रैकेट में दिए गए नाम  त्रिलोक सार की अपेक्षा है। नं.१७; २६; ३८; ३९; ४४; ५१; ५५; ७५; ७७ ये नौ नाम त्रि.सा. में नहीं हैं। इनके स्‍थान पर अन्‍य नौ नाम दिये हैं–अश्‍वस्‍थान; धूम; अक्ष;  चतुपाद; वस्‍तून; त्रस्‍त; एकजटी; श्रवण; (त्रि.सा./३६३-३७०) </li>
== सिद्धांतकोष से ==
</ol>
 
  <span class="HindiText"><strong>अठासी ग्रहों का नाम निर्देश</strong></br/> <span class="GRef">तिलोयपण्णत्ति/7/15-22  का भाषार्थ—</span> 
 
<big>1. बुध; 2. शुक्र; 3. वृहस्पति; 4. मंगल; 5. शनि; 6. काल; 7. लोहित; 8.कनक; 9. नील; 10. विकाल; 11. केश (कोश); 12. कवयव (कचयव); 13. कनक-संस्थान; 14. दुंदुभक (दुंदुभि); 15. रक्तनिभ; 16.नीलाभास; 17. अशोक संस्थान; 18. कंस; 19. रूपनिभ (रूपनिर्भास); 20. कंसकवर्ण (कंसवर्ण); 21. शंखपरिणाम; 22. तिलपुच्छ: 23. शंखवर्ण; 24. उदकवर्ण (उदय);  25. पंचवर्ण; 26. उत्पात; 27. धूमकेतु; 28. तिल; 29. नभ; 30. क्षारराशि; 31. विजिष्णु (विजयिष्णु); 32. सदृश; 33. संधि (शांति); 34. कलेवर; 35. अभिन्न (अभिन्न संधि);  36. ग्रंथि; 37. मानवक (मान); 38. कालक; 39. कालकेतु; 40. निलय; 41. अनय; 42. विद्युज्जिहृ;  43. सिंह; 44. अलक; 45. निर्दु:ख; 46. काल; 47. महाकाल; 48. रुद्र; 49. महारुद्र; 50.  संतान; 51. विपुल; 52. संभव; 53. स्वार्थी; 54. क्षेम (क्षेमंकर); 55. चंद्र;  56. निर्मंत्र; 57. ज्यातिष्माण; 58. दिशसंस्थित (दिशा); 59. विरत (विरज); 60. वीतशोक; 61. निश्चल; 62. प्रलंब; 63. भासुर; 64. स्वयंप्रभ; 65. विजय; 66. वैजयंत; 67. सीमंकर; 68. अपराजित; 69. जयंत; 70. विमल; 71. अभयंकर; 72. विकस; 73. काष्ठी (करिकाष्ठ); 74. विकट; 75. कज्जलो; 76. अग्निज्वाल; 77. अशोक; 78. केतु; 79. क्षीररस;  80. अघ; 81. श्रवण; 82. जलकेतु; 83. केतु (राहु); 84. अंतरद; 85. एकसंस्थान; 86. अश्व;  87. भावग्रह; 88. महाग्रह<br>
इस प्रकार ये 88 ग्रहों के नाम हैं।<BR><strong>नोट</strong>—ब्रैकेट में दिए गए नाम  त्रिलोक सार की अपेक्षा है। नं.17; 26; 38; 39; 44; 51; 55; 75; 77 ये नौ नाम त्रिलोकसार में नहीं हैं। इनके स्थान पर अन्य नौ नाम दिये हैं – अश्वस्थान; धूम; अक्ष;  चतुपाद; वस्तून; त्रस्त; एकजटी; श्रवण;<span class="GRef"> त्रिलोकसार/363-370</big> )</span> </li>
 
<ul>
<ul>
   <li><strong> ग्रहों की संख्‍या व  उनका लोक में अवस्‍थान—</strong>( देखें - [[ ज्‍यो‍तिष देव#2 | ज्‍यो‍तिष देव / २ ]])। </li>
   <li><strong> ग्रहों की संख्या व  उनका लोक में अवस्थान—</strong>(देखें [[ ज्योतिषदेव | ज्योतिष देव ]])। </li>
</ul>
</ul>
<p><strong>&nbsp;</strong></p></p>
<p><strong>&nbsp;</strong></p>
 
<noinclude>
[[ ग्रंथिम | पूर्व पृष्ठ ]]
 
[[ ग्रहण | अगला पृष्ठ ]]
 
</noinclude>
[[Category: ग]]
 
== पुराणकोष से ==
<span class="HindiText">  ज्योतिष्क देव । <span class="GRef"> महापुराण 3.84 </span></p>
 
 
<noinclude>
[[ ग्रंथिम | पूर्व पृष्ठ ]]


[[ग्रन्थिम | Previous Page]]
[[ ग्रहण | अगला पृष्ठ ]]
[[ग्रहण | Next Page]]


[[Category:ग]]
</noinclude>
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: ग]]
[[Category: करणानुयोग]]

Latest revision as of 22:20, 17 November 2023



सिद्धांतकोष से

 अठासी ग्रहों का नाम निर्देश
तिलोयपण्णत्ति/7/15-22 का भाषार्थ—


1. बुध; 2. शुक्र; 3. वृहस्पति; 4. मंगल; 5. शनि; 6. काल; 7. लोहित; 8.कनक; 9. नील; 10. विकाल; 11. केश (कोश); 12. कवयव (कचयव); 13. कनक-संस्थान; 14. दुंदुभक (दुंदुभि); 15. रक्तनिभ; 16.नीलाभास; 17. अशोक संस्थान; 18. कंस; 19. रूपनिभ (रूपनिर्भास); 20. कंसकवर्ण (कंसवर्ण); 21. शंखपरिणाम; 22. तिलपुच्छ: 23. शंखवर्ण; 24. उदकवर्ण (उदय); 25. पंचवर्ण; 26. उत्पात; 27. धूमकेतु; 28. तिल; 29. नभ; 30. क्षारराशि; 31. विजिष्णु (विजयिष्णु); 32. सदृश; 33. संधि (शांति); 34. कलेवर; 35. अभिन्न (अभिन्न संधि); 36. ग्रंथि; 37. मानवक (मान); 38. कालक; 39. कालकेतु; 40. निलय; 41. अनय; 42. विद्युज्जिहृ; 43. सिंह; 44. अलक; 45. निर्दु:ख; 46. काल; 47. महाकाल; 48. रुद्र; 49. महारुद्र; 50. संतान; 51. विपुल; 52. संभव; 53. स्वार्थी; 54. क्षेम (क्षेमंकर); 55. चंद्र; 56. निर्मंत्र; 57. ज्यातिष्माण; 58. दिशसंस्थित (दिशा); 59. विरत (विरज); 60. वीतशोक; 61. निश्चल; 62. प्रलंब; 63. भासुर; 64. स्वयंप्रभ; 65. विजय; 66. वैजयंत; 67. सीमंकर; 68. अपराजित; 69. जयंत; 70. विमल; 71. अभयंकर; 72. विकस; 73. काष्ठी (करिकाष्ठ); 74. विकट; 75. कज्जलो; 76. अग्निज्वाल; 77. अशोक; 78. केतु; 79. क्षीररस; 80. अघ; 81. श्रवण; 82. जलकेतु; 83. केतु (राहु); 84. अंतरद; 85. एकसंस्थान; 86. अश्व; 87. भावग्रह; 88. महाग्रह

इस प्रकार ये 88 ग्रहों के नाम हैं।
नोट—ब्रैकेट में दिए गए नाम त्रिलोक सार की अपेक्षा है। नं.17; 26; 38; 39; 44; 51; 55; 75; 77 ये नौ नाम त्रिलोकसार में नहीं हैं। इनके स्थान पर अन्य नौ नाम दिये हैं – अश्वस्थान; धूम; अक्ष; चतुपाद; वस्तून; त्रस्त; एकजटी; श्रवण; त्रिलोकसार/363-370
)

  • ग्रहों की संख्या व उनका लोक में अवस्थान—(देखें ज्योतिष देव )।

 


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

पुराणकोष से

ज्योतिष्क देव । महापुराण 3.84


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=ग्रह&oldid=120177"
Categories:
  • ग
  • पुराण-कोष
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 17 November 2023, at 22:20.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki