• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

ताल प्रलंब: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 16:23, 19 August 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Latest revision as of 22:21, 17 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(2 intermediate revisions by 2 users not shown)
Line 1: Line 1:
<p> भगवती आराधना / विजयोदया टीका/1123/1130/11 <span class="SanskritText"> तालशब्दो न तरुविशेषवचन: किंतु  वनस्पत्येकदेशस्तरुविशेष उपलक्षणाय वनस्पतीनां गृहीतं...प्रलंबं द्विविधं  मूलप्रलंबं, अग्रप्रलंबं च। कंदमूलफलाख्यं, भूस्यनुप्रवेशिकंदमूलप्रलंबं  अंकुरप्रवालफलपत्राणि अग्रप्रलंबानि। तालस्य प्रलंबं तालप्रलंबं वनस्पतेरंकुरादिकं  च लभ्यत इति।</span>=<span class="HindiText">ताल प्रलंब इस सामासिक शब्द में जो ताल शब्द है उसका अर्थ ताड़  का वृक्ष इतना ही लोक नहीं समझते हैं। किंतु वनस्पति का एकदेश रूप जो ताड़ का  वृक्ष वह इन वनस्पतियों का उपलक्षण रूप समझकर उससे संपूर्ण वनस्पतिओं का ग्रहण  करते हैं।...<br />
<p><span class="GRef"> भगवती आराधना / विजयोदया टीका/1123/1130/11 </span><span class="SanskritText"> तालशब्दो न तरुविशेषवचन: किंतु  वनस्पत्येकदेशस्तरुविशेष उपलक्षणाय वनस्पतीनां गृहीतं...प्रलंबं द्विविधं  मूलप्रलंबं, अग्रप्रलंबं च। कंदमूलफलाख्यं, भूस्यनुप्रवेशिकंदमूलप्रलंबं  अंकुरप्रवालफलपत्राणि अग्रप्रलंबानि। तालस्य प्रलंबं तालप्रलंबं वनस्पतेरंकुरादिकं  च लभ्यत इति।</span>=<span class="HindiText">ताल प्रलंब इस सामासिक शब्द में जो ताल शब्द है उसका अर्थ ताड़  का वृक्ष इतना ही लोक नहीं समझते हैं। किंतु वनस्पति का एकदेश रूप जो ताड़ का  वृक्ष वह इन वनस्पतियों का उपलक्षण रूप समझकर उससे संपूर्ण वनस्पतिओं का ग्रहण  करते हैं।...<br />
‘ताल प्रलंब’ इस शब्द में जो प्रलंब शब्द है उसका स्पष्टीकरण  करते हैं–प्रलंब के मूल प्रलंब, अग्र प्रलंब ऐसे दो भेद हैं। कंदमूल और  अंकुर जो भूमि में प्रविष्ट हुए हैं उनको मूलप्रलंब कहते हैं। अंकुर, कोमल  पत्ते, फल और कठोर पत्ते इनको अग्रप्रलंब कहते हैं। अर्थात् तालप्रलंब इस शब्द  का अर्थ उपलक्षण से वनस्पतियों के अंकुरादिक ऐसा होता है ( धवला 1/1,1,1/9  पर  विशेषार्थ)। </span></p>
‘ताल प्रलंब’ इस शब्द में जो प्रलंब शब्द है उसका स्पष्टीकरण  करते हैं–प्रलंब के मूल प्रलंब, अग्र प्रलंब ऐसे दो भेद हैं। कंदमूल और  अंकुर जो भूमि में प्रविष्ट हुए हैं उनको मूलप्रलंब कहते हैं। अंकुर, कोमल  पत्ते, फल और कठोर पत्ते इनको अग्रप्रलंब कहते हैं। अर्थात् तालप्रलंब इस शब्द  का अर्थ उपलक्षण से वनस्पतियों के अंकुरादिक ऐसा होता है <span class="GRef">( धवला 1/1,1,1/9  </span>पर  विशेषार्थ)। </span></p>


<noinclude>
<noinclude>
Line 9: Line 9:
</noinclude>
</noinclude>
[[Category: त]]
[[Category: त]]
[[Category: करणानुयोग]]

Latest revision as of 22:21, 17 November 2023



भगवती आराधना / विजयोदया टीका/1123/1130/11 तालशब्दो न तरुविशेषवचन: किंतु वनस्पत्येकदेशस्तरुविशेष उपलक्षणाय वनस्पतीनां गृहीतं...प्रलंबं द्विविधं मूलप्रलंबं, अग्रप्रलंबं च। कंदमूलफलाख्यं, भूस्यनुप्रवेशिकंदमूलप्रलंबं अंकुरप्रवालफलपत्राणि अग्रप्रलंबानि। तालस्य प्रलंबं तालप्रलंबं वनस्पतेरंकुरादिकं च लभ्यत इति।=ताल प्रलंब इस सामासिक शब्द में जो ताल शब्द है उसका अर्थ ताड़ का वृक्ष इतना ही लोक नहीं समझते हैं। किंतु वनस्पति का एकदेश रूप जो ताड़ का वृक्ष वह इन वनस्पतियों का उपलक्षण रूप समझकर उससे संपूर्ण वनस्पतिओं का ग्रहण करते हैं।...
‘ताल प्रलंब’ इस शब्द में जो प्रलंब शब्द है उसका स्पष्टीकरण करते हैं–प्रलंब के मूल प्रलंब, अग्र प्रलंब ऐसे दो भेद हैं। कंदमूल और अंकुर जो भूमि में प्रविष्ट हुए हैं उनको मूलप्रलंब कहते हैं। अंकुर, कोमल पत्ते, फल और कठोर पत्ते इनको अग्रप्रलंब कहते हैं। अर्थात् तालप्रलंब इस शब्द का अर्थ उपलक्षण से वनस्पतियों के अंकुरादिक ऐसा होता है ( धवला 1/1,1,1/9 पर विशेषार्थ)।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=ताल_प्रलंब&oldid=120511"
Categories:
  • त
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 17 November 2023, at 22:21.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki