• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अंजन: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 14:56, 7 December 2022 (view source)
J2jinendra (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Latest revision as of 14:40, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(One intermediate revision by one other user not shown)
Line 22: Line 22:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p id="1">(1) पूर्व विदेह क्षेत्र का एक वक्षार पर्वत । यह सीता नदी से निषद्य कुलाचल तक विस्तृत है । <span class="GRef"> महापुराण 63. 201-203,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.228-229 </span></p>
<div class="HindiText">  <p id="1" class="HindiText">(1) पूर्व विदेह क्षेत्र का एक वक्षार पर्वत । यह सीता नदी से निषद्य कुलाचल तक विस्तृत है । <span class="GRef"> महापुराण 63. 201-203,  </span><span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_5#228|हरिवंशपुराण - 5.228-229]] </span></p>
<p id="2">(2) सानत्कुमार और माहेंद्र कल्पों का प्रथम पटल और इंद्रक विमान । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 6.48  </span>दे9 सानत्कुमार</p>
<p id="2" class="HindiText">(2) सानत्कुमार और माहेंद्र कल्पों का प्रथम पटल और इंद्रक विमान । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_6#48|हरिवंशपुराण - 6.48]] </span>दे9 सानत्कुमार</p>
<p id="3">(3) रुचकवर पर्वत का सातवाँ कूट । यहाँ आनंदा देवी रहती है । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.703  </span>देखें [[ रुचकवर ]]</p>
<p id="3" class="HindiText">(3) रुचकवर पर्वत का सातवाँ कूट । यहाँ आनंदा देवी रहती है । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_5#703|हरिवंशपुराण - 5.703]] </span>देखें [[ रुचकवर ]]</p>
<p id="4">(4) प्रथम नरकभूमि रत्नप्रभा के खरभाग का दसवाँ पटल । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 4.52-54  </span>देखें [[ खरभाग ]]</p>
<p id="4" class="HindiText">(4) प्रथम नरकभूमि रत्नप्रभा के खरभाग का दसवाँ पटल । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_4#52|हरिवंशपुराण - 4.52-54]] </span>देखें [[ खरभाग ]]</p>
<p id="5">(5) एक जनपद । तीर्थंकर नेमिनाथ विहार करते हुए यहाँ आये थे । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 59.109-111 </span></p>
<p id="5" class="HindiText">(5) एक जनपद । तीर्थंकर नेमिनाथ विहार करते हुए यहाँ आये थे । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_59#109|हरिवंशपुराण - 59.109-111]] </span></p>
<p id="6">(6) सुमेरु पर्वत के पांडुक वन का एक भवन । इसकी चौड़ाई और परिधि पैंतालीस योजन है । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.316, 319-322 </span></p>
<p id="6" class="HindiText">(6) सुमेरु पर्वत के पांडुक वन का एक भवन । इसकी चौड़ाई और परिधि पैंतालीस योजन है । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_5#316|हरिवंशपुराण - 5.316]],[[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_5#319|हरिवंशपुराण - 5.319-322]] </span></p>
<p id="7">(7) मध्यलोक के सोलहवें द्वीप और सागर के आगे असंख्यात द्वीपों और सागरों में पाँचवाँ द्वीप एवं सागर । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.622-626  </span></p>
<p id="7" class="HindiText">(7) मध्यलोक के सोलहवें द्वीप और सागर के आगे असंख्यात द्वीपों और सागरों में पाँचवाँ द्वीप एवं सागर । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_5#622|हरिवंशपुराण - 5.622-626]] </span></p>
<p id="8">(8) आँखों का सौंदर्य-प्रसाधन । <span class="GRef"> महापुराण 14.9 </span></p>
<p id="8" class="HindiText">(8) आँखों का सौंदर्य-प्रसाधन । <span class="GRef"> महापुराण 14.9 </span></p>
   </div>
   </div>


Line 40: Line 40:
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: अ]]
[[Category: अ]]
[[Category: करणानुयोग]]

Latest revision as of 14:40, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

1. सानत्कुमार स्वर्ग का प्रथम पटल व इंद्रक - देखें स्वर्ग - 5.3।

2. पूर्व विदेहस्थ एक वक्षार, उसका कूट व रक्षक देव - देखें लोक - 5.3।

3. पूर्व विदेहस्थ वैश्रवण वक्षारका एक कूट व उसका रक्षक देव - देखें लोक - 5.4।

4. रुचक पर्वतस्थ एक कूट - देखें लोक - 5.13।

5. मानुषोत्तर पर्वतस्थ एक कूट - देखें लोक - 5.10।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) पूर्व विदेह क्षेत्र का एक वक्षार पर्वत । यह सीता नदी से निषद्य कुलाचल तक विस्तृत है । महापुराण 63. 201-203, हरिवंशपुराण - 5.228-229

(2) सानत्कुमार और माहेंद्र कल्पों का प्रथम पटल और इंद्रक विमान । हरिवंशपुराण - 6.48 दे9 सानत्कुमार

(3) रुचकवर पर्वत का सातवाँ कूट । यहाँ आनंदा देवी रहती है । हरिवंशपुराण - 5.703 देखें रुचकवर

(4) प्रथम नरकभूमि रत्नप्रभा के खरभाग का दसवाँ पटल । हरिवंशपुराण - 4.52-54 देखें खरभाग

(5) एक जनपद । तीर्थंकर नेमिनाथ विहार करते हुए यहाँ आये थे । हरिवंशपुराण - 59.109-111

(6) सुमेरु पर्वत के पांडुक वन का एक भवन । इसकी चौड़ाई और परिधि पैंतालीस योजन है । हरिवंशपुराण - 5.316,हरिवंशपुराण - 5.319-322

(7) मध्यलोक के सोलहवें द्वीप और सागर के आगे असंख्यात द्वीपों और सागरों में पाँचवाँ द्वीप एवं सागर । हरिवंशपुराण - 5.622-626

(8) आँखों का सौंदर्य-प्रसाधन । महापुराण 14.9


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अंजन&oldid=123724"
Categories:
  • अ
  • पुराण-कोष
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 14:40.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki