• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

नल: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 16:54, 14 November 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Latest revision as of 15:11, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(2 intermediate revisions by 2 users not shown)
Line 1: Line 1:


== सिद्धांतकोष से ==
== सिद्धांतकोष से ==
―(<span class="GRef"> पद्मपुराण/9/13  </span>व 119/39) सुग्रीव के चचा ऋक्षरज का पुत्र था।13। अंत में दीक्षित हो गया था।39।
<span class="GRef"> (पद्मपुराण/9/13 व 119/39) </span> सुग्रीव के चचा ऋक्षरज का पुत्र था।13। अंत में दीक्षित हो गया था।39।


<noinclude>
<noinclude>
Line 13: Line 13:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p> किष्कुप्रमोद नगर का राजा एक विद्याधर । यह सूर्यरज के छोटे भाई और सुग्रीव के चाचा ऋक्षरज और उसकी हरिकांता रानी का पुत्र तथा नील का अग्रज था । इसने हरिमालिनी अपनी पुत्री हनुमान् को दी थी, राम-लक्ष्मण के साथ सिद्धशिला के दर्शन किये थे और अपने भाई के साथ राम की सहायता की थी । इसी ने बेलन्वर नगर के स्वामी समुद्र विद्याधर को बाहुबल से बाँधा था तथा राम का आज्ञाकारी होने से उसे सम्मान पूर्वक छोड़ते हुए उसी नगर का राजा बना दिया था । इसने युद्ध में रावण के मंत्री हस्त को रथ रहित करके उसे विह्वल कर दिया था । लंका विजय के पश्चात् इसने राम से किष्किंधपुर का राज्य प्राप्त किया । कुछ समय तक राज्य का भोग करके यह दीक्षित हो गया । <span class="GRef"> पद्मपुराण 9.13, 19.104, 48. 189-195, 54.34-36, 65-67, 58.45, 59.17, 88.40, 11.939 </span></p>
<div class="HindiText">  <p class="HindiText"> किष्कुप्रमोद नगर का राजा एक विद्याधर । यह सूर्यरज के छोटे भाई और सुग्रीव के चाचा ऋक्षरज और उसकी हरिकांता रानी का पुत्र तथा नील का अग्रज था । इसने हरिमालिनी अपनी पुत्री हनुमान् को दी थी, राम-लक्ष्मण के साथ सिद्धशिला के दर्शन किये थे और अपने भाई के साथ राम की सहायता की थी । इसी ने बेलन्वर नगर के स्वामी समुद्र विद्याधर को बाहुबल से बाँधा था तथा राम का आज्ञाकारी होने से उसे सम्मान पूर्वक छोड़ते हुए उसी नगर का राजा बना दिया था । इसने युद्ध में रावण के मंत्री हस्त को रथ रहित करके उसे विह्वल कर दिया था । लंका विजय के पश्चात् इसने राम से किष्किंधपुर का राज्य प्राप्त किया । कुछ समय तक राज्य का भोग करके यह दीक्षित हो गया । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:पद्मपुराण_-_पर्व_9#13|पद्मपुराण - 9.13]],[[ग्रन्थ:पद्मपुराण_-_पर्व_9#19|पद्मपुराण - 9.19]].104, 48. 189-195, 54.34-36, 65-67, 58.45, 59.17, 88.40, 11.939 </span></p>
   </div>
   </div>


Line 24: Line 24:
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: न]]
[[Category: न]]
[[Category: प्रथमानुयोग]]

Latest revision as of 15:11, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

(पद्मपुराण/9/13 व 119/39) सुग्रीव के चचा ऋक्षरज का पुत्र था।13। अंत में दीक्षित हो गया था।39।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

किष्कुप्रमोद नगर का राजा एक विद्याधर । यह सूर्यरज के छोटे भाई और सुग्रीव के चाचा ऋक्षरज और उसकी हरिकांता रानी का पुत्र तथा नील का अग्रज था । इसने हरिमालिनी अपनी पुत्री हनुमान् को दी थी, राम-लक्ष्मण के साथ सिद्धशिला के दर्शन किये थे और अपने भाई के साथ राम की सहायता की थी । इसी ने बेलन्वर नगर के स्वामी समुद्र विद्याधर को बाहुबल से बाँधा था तथा राम का आज्ञाकारी होने से उसे सम्मान पूर्वक छोड़ते हुए उसी नगर का राजा बना दिया था । इसने युद्ध में रावण के मंत्री हस्त को रथ रहित करके उसे विह्वल कर दिया था । लंका विजय के पश्चात् इसने राम से किष्किंधपुर का राज्य प्राप्त किया । कुछ समय तक राज्य का भोग करके यह दीक्षित हो गया । पद्मपुराण - 9.13,पद्मपुराण - 9.19.104, 48. 189-195, 54.34-36, 65-67, 58.45, 59.17, 88.40, 11.939


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=नल&oldid=126037"
Categories:
  • न
  • पुराण-कोष
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:11.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki