• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

शरण: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 13:35, 6 January 2016 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
No edit summary
 
Latest revision as of 15:25, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(9 intermediate revisions by 3 users not shown)
Line 1: Line 1:
रा.वा./९/७/२/६००/१५ <p class="SanskritText">शरणं द्विविधं-लौकिकं लोकोत्तरं चेति। तत्प्रत्येकं त्रिधा-जीवाजीवमिश्रकभेदात् । तत्र राजा देवता वा लौकिकं जीवशरणम्, प्राकारादि अजीवशरणम् । ग्रामनगरादि मिश्रकम् । पञ्च गुरवो लोकोत्तरजीवशरणम्, तत्प्रतिबिम्बाद्यजीवशरणम्, सधर्मोपकरणसाधुवर्णो मिश्रकशरणम् ।</p>
<span class="GRef">( राजवार्तिक/9/7/2/600/15 ) </span><p class="SanskritText">शरणं द्विविधं-लौकिकं लोकोत्तरं चेति। तत्प्रत्येकं त्रिधा-जीवाजीवमिश्रकभेदात् । तत्र राजा देवता वा लौकिकं जीवशरणम्, प्राकारादि अजीवशरणम् । ग्रामनगरादि मिश्रकम् । पंच गुरवो लोकोत्तरजीवशरणम्, तत्प्रतिबिंबाद्यजीवशरणं, सधर्मोपकरणसाधुवर्णो मिश्रकशरणम् ।</p>
<p class="HindiText">शरण दो प्रकार का है - एक लौकिक दूसरा लोकोत्तर। तथा वे दोनों ही जीव, अजीव और मिश्रक के भेद से तीन-तीन प्रकार के हैं। </p>
<p class="HindiText">शरण दो प्रकार का है - एक लौकिक दूसरा लोकोत्तर। तथा वे दोनों ही जीव, अजीव और मिश्रक के भेद से तीन-तीन प्रकार के हैं। </p>
<div class="HindiText"><ol>
<ol class="HindiText">
<li><span>लौकिक</span>
<li class="HindiText"><strong>लौकिक</strong></span>
<ul>
<ul>
  <li>
  <li>
  <p>राजा देवता आदि लौकिक जीवशरण हैं। </p>
  <p class="HindiText">राजा देवता आदि लौकिक जीवशरण हैं। </p>
  </li>
  </li>
  <li>
  <li>
  <p>कोट, शहर, पनाह आदि लौकिक अजीव शरण हैं। </p>
  <p class="HindiText">कोट, शहर, पनाह आदि लौकिक अजीव शरण हैं। </p>
  </li>
  </li>
  <li>
  <li>
  <p>और कोट खाई सहित गाँव नगर आदि लौकिक मिश्र शरण हैं। </p>
  <p class="HindiText">और कोट खाई सहित गाँव नगर आदि लौकिक मिश्र शरण हैं। </p>
  </li>
  </li>
</ul>
</ul>
<li><span>लोकोत्तर</span>
<li class="HindiText"><strong>लोकोत्तर</strong></span>
<ul>
<ul>
  <li>
  <li>
  <p>पाँचों परमेष्ठी लोकोत्तर जीव शरण है। </p>
  <p class="HindiText">पाँचों परमेष्ठी लोकोत्तर जीव शरण है। </p>
  </li>
  </li>
  <li>
  <li>
  <p>इन अरहंत आदि के प्रतिबिंब आदि लोकोत्तर अजीव शरण हैं।  
  <p class="HindiText">इन अरहंत आदि के प्रतिबिंब आदि लोकोत्तर अजीव शरण हैं।  
  </p>
  </p>
  </li>
  </li>
  <li>
  <li>
  <p>धर्म सहित साधुओं का समुदाय तथा उनके उपकरण आदि लोकोत्तर मिश्र शरण हैं। (चा.सा./१७८/४)</p>
  <p class="HindiText">धर्म सहित साधुओं का समुदाय तथा उनके उपकरण आदि लोकोत्तर मिश्र शरण हैं। <span class="GRef">( चारित्रसार/178/4 )</span></p>
  </li>
  </li>
</ul>
</ul>
</ol>
</ol>
</div>


[[शय्या परिषह | Previous Page]]
<noinclude>
[[शरावती | Next Page]]
[[ शर | पूर्व पृष्ठ ]]


[[Category:श]]
[[ शरण्य | अगला पृष्ठ ]]
 
</noinclude>
[[Category: श]]
[[Category: द्रव्यानुयोग]]

Latest revision as of 15:25, 27 November 2023

( राजवार्तिक/9/7/2/600/15 )

शरणं द्विविधं-लौकिकं लोकोत्तरं चेति। तत्प्रत्येकं त्रिधा-जीवाजीवमिश्रकभेदात् । तत्र राजा देवता वा लौकिकं जीवशरणम्, प्राकारादि अजीवशरणम् । ग्रामनगरादि मिश्रकम् । पंच गुरवो लोकोत्तरजीवशरणम्, तत्प्रतिबिंबाद्यजीवशरणं, सधर्मोपकरणसाधुवर्णो मिश्रकशरणम् ।

शरण दो प्रकार का है - एक लौकिक दूसरा लोकोत्तर। तथा वे दोनों ही जीव, अजीव और मिश्रक के भेद से तीन-तीन प्रकार के हैं।

  1. लौकिक
    • राजा देवता आदि लौकिक जीवशरण हैं।

    • कोट, शहर, पनाह आदि लौकिक अजीव शरण हैं।

    • और कोट खाई सहित गाँव नगर आदि लौकिक मिश्र शरण हैं।

  2. लोकोत्तर
    • पाँचों परमेष्ठी लोकोत्तर जीव शरण है।

    • इन अरहंत आदि के प्रतिबिंब आदि लोकोत्तर अजीव शरण हैं।

    • धर्म सहित साधुओं का समुदाय तथा उनके उपकरण आदि लोकोत्तर मिश्र शरण हैं। ( चारित्रसार/178/4 )


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=शरण&oldid=129282"
Categories:
  • श
  • द्रव्यानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:25.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki