• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

आदित्य: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 13:16, 5 March 2023 (view source)
Sayyam (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Latest revision as of 14:40, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(One intermediate revision by one other user not shown)
Line 15: Line 15:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p id="1"> (1) लौकांतिक देवों का एक भेद । ये ब्रह्मलोक के निवासी, पूर्वभवों के ज्ञाता, शुभ लेश्या एवं शुभ भावना वाले सौम्य, महाऋद्धिधारी, लोक के अंत में निवास करने के कारण ‘लौकांतिक’ इस नाम से विख्यात, तीर्थंकरों के प्रबोधनार्थ स्वर्ग से भूमि पर आने वाले देव है । <span class="GRef"> महापुराण 17.47-50,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 2.49, 9.63-64,  </span><span class="GRef"> वीरवर्द्धमान चरित्र 12.2-8 </span></p>
<div class="HindiText">  <p id="1" class="HindiText"> (1) लौकांतिक देवों का एक भेद । ये ब्रह्मलोक के निवासी, पूर्वभवों के ज्ञाता, शुभ लेश्या एवं शुभ भावना वाले सौम्य, महाऋद्धिधारी, लोक के अंत में निवास करने के कारण ‘लौकांतिक’ इस नाम से विख्यात, तीर्थंकरों के प्रबोधनार्थ स्वर्ग से भूमि पर आने वाले देव है । <span class="GRef"> महापुराण 17.47-50,  </span><span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_2#49|हरिवंशपुराण - 2.49]], 9.63-64,  </span><span class="GRef"> वीरवर्द्धमान चरित्र 12.2-8 </span></p>
<p id="2">(2) नौ अनुदिश विमानों में एक इंद्रक विमान । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 6.54,64  </span></p>
<p id="2" class="HindiText">(2) नौ अनुदिश विमानों में एक इंद्रक विमान । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_6#54|हरिवंशपुराण - 6.54]],64  </span></p>
<p id="3">(3) चंपापुर का राजा । कालिंदों में प्रवाहित पांडु के पुत्र कर्ण को इसी ने प्राप्त किया था । <span class="GRef"> महापुराण 70.109-114 </span></p>
<p id="3" class="HindiText">(3) चंपापुर का राजा । कालिंदों में प्रवाहित पांडु के पुत्र कर्ण को इसी ने प्राप्त किया था । <span class="GRef"> महापुराण 70.109-114 </span></p>
<p id="4">(4) इस नाम के एक मुनि । इन्होंने चंद्राभनगर के राजा धनपति को भविष्यवाणी की थी कि इसकी पुत्री पद्मोत्तमा को एक सर्प काटेगा और जीवंधरकुमार उसका विष उतारेगा । <span class="GRef"> महापुराण 75. 390-398 </span></p>
<p id="4" class="HindiText">(4) इस नाम के एक मुनि । इन्होंने चंद्राभनगर के राजा धनपति को भविष्यवाणी की थी कि इसकी पुत्री पद्मोत्तमा को एक सर्प काटेगा और जीवंधरकुमार उसका विष उतारेगा । <span class="GRef"> महापुराण 75. 390-398 </span></p>
   </div>
   </div>


Line 30: Line 30:
[[Category: आ]]
[[Category: आ]]
[[Category: करणानुयोग]]
[[Category: करणानुयोग]]
[[Category: प्रथमानुयोग]]

Latest revision as of 14:40, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

1. यह आठ लौकांतिक देवों में से दूसरा देव है। - देखें लौकांतिक_देव ;

2. यह अनुदिश स्वर्ग के बीचोंबीच का पटल व इंद्रक विमान भी है। - देखें स्वर्ग - 5.4।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) लौकांतिक देवों का एक भेद । ये ब्रह्मलोक के निवासी, पूर्वभवों के ज्ञाता, शुभ लेश्या एवं शुभ भावना वाले सौम्य, महाऋद्धिधारी, लोक के अंत में निवास करने के कारण ‘लौकांतिक’ इस नाम से विख्यात, तीर्थंकरों के प्रबोधनार्थ स्वर्ग से भूमि पर आने वाले देव है । महापुराण 17.47-50, हरिवंशपुराण - 2.49, 9.63-64, वीरवर्द्धमान चरित्र 12.2-8

(2) नौ अनुदिश विमानों में एक इंद्रक विमान । हरिवंशपुराण - 6.54,64

(3) चंपापुर का राजा । कालिंदों में प्रवाहित पांडु के पुत्र कर्ण को इसी ने प्राप्त किया था । महापुराण 70.109-114

(4) इस नाम के एक मुनि । इन्होंने चंद्राभनगर के राजा धनपति को भविष्यवाणी की थी कि इसकी पुत्री पद्मोत्तमा को एक सर्प काटेगा और जीवंधरकुमार उसका विष उतारेगा । महापुराण 75. 390-398


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=आदित्य&oldid=123830"
Categories:
  • आ
  • पुराण-कोष
  • करणानुयोग
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 14:40.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki