• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

लोकसेन: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 15:25, 6 October 2014 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Latest revision as of 15:21, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(10 intermediate revisions by 4 users not shown)
Line 1: Line 1:
<p class="HindiText">पंचस्तूपसंघ की गुर्वावली के अनुसार (देखें - [[ इतिहास | इतिहास ]]) आप आचार्य गुणभद्र के प्रमुख शिष्य थे। राजा अकालवर्ष के समकालीन राजा लोकादित्य की राजधानी बङ्‌कापुर में रहकर, आचार्य गुणभद्र रचित अधूरे उत्तर पुराण को श्रावण कृ ५ श. ८२० में पूरा किया था। तदनुसार इनका समय−ई. ८९७−९३० (जीवन्धरचम्पू प्र./8/A. N. Up.); (म. पु./प्र. ३५/पं. पन्नालाल)− देखें - [[ इतिहास#7.7 | इतिहास / ७ / ७ ]]।</p>

== सिद्धांतकोष से ==
<div class="HindiText">पंचस्तूपसंघ की गुर्वावली के अनुसार (देखें [[ इतिहास#7.7 | इतिहास7.7 ]]) आप आचार्य गुणभद्र के प्रमुख शिष्य थे। राजा अकालवर्ष के समकालीन राजा लोकादित्य की राजधानी बंकापुर में रहकर, आचार्य गुणभद्र रचित अधूरे उत्तर पुराण को श्रावण कृ 5 श. 820 में पूरा किया था। तदनुसार इनका समय−ई. 897−930 (जीवंधरचंपू प्र./8/A. N. Up.); <span class="GRef">( महापुराण/ </span>प्र. 35/पं. पन्नालाल)−देखें [[ इतिहास#7.7 | इतिहास7.7 ]]।


[[लोक श्रेणी | Previous Page]]
<noinclude>
[[लोकादित्य | Next Page]]
[[ लोकसुंदरी | पूर्व पृष्ठ ]]


[[Category:ल]]
[[ लोकस्तूप | अगला पृष्ठ ]]
 
</noinclude>
[[Category: ल]]
 
 
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p  class="HindiText"> शास्त्रों के जानकार अखंड चारित्रधारी एक मुनि । ये आचार्य गुणभद्र के प्रमुख शिष्य थे । इन्होंने उत्तरपुराण की रचना में सहायता देकर अपनी उत्कष्ट गुरु-भक्ति प्रकट की थी । <span class="GRef"> महापुराण  </span>प्रशस्ति पद्य 28</p>
  </div>
 
<noinclude>
[[ लोकसुंदरी | पूर्व पृष्ठ ]]
 
[[ लोकस्तूप | अगला पृष्ठ ]]
 
</noinclude>
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: ल]
[[Category: प्रथमानुयोग]]
[[Category: इतिहास]]

Latest revision as of 15:21, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

पंचस्तूपसंघ की गुर्वावली के अनुसार (देखें इतिहास7.7 ) आप आचार्य गुणभद्र के प्रमुख शिष्य थे। राजा अकालवर्ष के समकालीन राजा लोकादित्य की राजधानी बंकापुर में रहकर, आचार्य गुणभद्र रचित अधूरे उत्तर पुराण को श्रावण कृ 5 श. 820 में पूरा किया था। तदनुसार इनका समय−ई. 897−930 (जीवंधरचंपू प्र./8/A. N. Up.); ( महापुराण/ प्र. 35/पं. पन्नालाल)−देखें इतिहास7.7 ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

शास्त्रों के जानकार अखंड चारित्रधारी एक मुनि । ये आचार्य गुणभद्र के प्रमुख शिष्य थे । इन्होंने उत्तरपुराण की रचना में सहायता देकर अपनी उत्कष्ट गुरु-भक्ति प्रकट की थी । महापुराण प्रशस्ति पद्य 28


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ [[Category: ल]

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=लोकसेन&oldid=128357"
Categories:
  • ल
  • पुराण-कोष
  • प्रथमानुयोग
  • इतिहास
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:21.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki