• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

पुर: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 21:43, 5 July 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Latest revision as of 15:15, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(4 intermediate revisions by 2 users not shown)
Line 1: Line 1:
== सिद्धांतकोष से ==

देखें [[ नगर ]]।
== सिद्धांतकोष से ==
<span class="GRef"> महापुराण/16/169-170  </span><span class="SanskritText">परिखागोपुराट्टालवप्रप्राकारमंडितम् । नानाभवनविन्यासं सोद्यानं सजलाशयम् ।169।  पुरमेवंविधं शस्तं उचितोद्देशसुस्थितम् । पूर्वोत्तर-प्लवांभस्कं  प्रधानपुरुषोचितम् ।170।</span>
=<span class="HindiText">जो परिखा, गोपुर, अटारी, कोट और प्राकार से सुशोभित हो,  जिसमें अनेक भवन बने हुए हों, जो बगीचे और तालाबों से सहित हो, जो उत्तम रीति से  अच्छे स्थान पर बसा हुआ हो, जिसमें पानी का प्रवाह ईशान दिशा की ओर हो और जो  प्रधान पुरुषों के रहने के योग्य हो वह प्रशंसनीय <b>पुर </b>अथवा नगर कहलाता है।169-170।</span><br/>
<span class="HindiText"> अधिक जानकारी के लिए देखें [[ नगर ]]।</span>
 


<noinclude>
<noinclude>
Line 9: Line 13:
</noinclude>
</noinclude>
[[Category: प]]
[[Category: प]]


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
  <p> परिखा, गोपुर, अटारी, कोट और प्राकार से शोभित, अनेक भवन, उद्यान और जलाशयों से युक्त प्रधान पुरुषों की आवासभूमि । आदिनाथ के समय में ऐसे अनेक नगर निर्मित किये गये थे । <span class="GRef"> महापुराण 16. 169-170,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 9.38 </span></p>
<div class="HindiText"> <p class="HindiText"> परिखा, गोपुर, अटारी, कोट और प्राकार से शोभित, अनेक भवन, उद्यान और जलाशयों से युक्त प्रधान पुरुषों की आवासभूमि । आदिनाथ के समय में ऐसे अनेक नगर निर्मित किये गये थे । <span class="GRef"> महापुराण 16. 169-170,  </span><span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_9#38|हरिवंशपुराण - 9.38]] </span></p>
  </div>


<noinclude>
<noinclude>
Line 23: Line 26:
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: प]]
[[Category: प]]
[[Category: करणानुयोग]]

Latest revision as of 15:15, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

महापुराण/16/169-170 परिखागोपुराट्टालवप्रप्राकारमंडितम् । नानाभवनविन्यासं सोद्यानं सजलाशयम् ।169। पुरमेवंविधं शस्तं उचितोद्देशसुस्थितम् । पूर्वोत्तर-प्लवांभस्कं प्रधानपुरुषोचितम् ।170। =जो परिखा, गोपुर, अटारी, कोट और प्राकार से सुशोभित हो, जिसमें अनेक भवन बने हुए हों, जो बगीचे और तालाबों से सहित हो, जो उत्तम रीति से अच्छे स्थान पर बसा हुआ हो, जिसमें पानी का प्रवाह ईशान दिशा की ओर हो और जो प्रधान पुरुषों के रहने के योग्य हो वह प्रशंसनीय पुर अथवा नगर कहलाता है।169-170।
अधिक जानकारी के लिए देखें नगर ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

पुराणकोष से

परिखा, गोपुर, अटारी, कोट और प्राकार से शोभित, अनेक भवन, उद्यान और जलाशयों से युक्त प्रधान पुरुषों की आवासभूमि । आदिनाथ के समय में ऐसे अनेक नगर निर्मित किये गये थे । महापुराण 16. 169-170, हरिवंशपुराण - 9.38


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=पुर&oldid=126566"
Categories:
  • प
  • पुराण-कोष
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:15.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki