• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अनुवाद: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 00:20, 8 May 2009 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
(New page: धवला पुस्तक संख्या १/१,१,२४/२०१/४ गतिरुक्तलक्षणा, तस्याः वदनं वादः। प्...)
 
Latest revision as of 21:24, 18 July 2025 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
No edit summary
 
(11 intermediate revisions by 4 users not shown)
Line 1: Line 1:
[[धवला]] पुस्तक संख्या  १/१,१,२४/२०१/४ गतिरुक्तलक्षणा, तस्याः वदनं वादः। प्रसिद्धस्याचार्यपरम्परागतस्यार्थस्य अनु पश्चात् वादोऽनुवादः।<br>
<span class="GRef">धवला पुस्तक 1/1,1,24/201/4 </span><span class="SanskritText">गतिरुक्तलक्षणा, तस्याः वदनं वादः। प्रसिद्धस्याचार्यपरंपरागतस्यार्थस्य अनु पश्चात् वादोऽनुवादः।</span>
<p class="HindiSentence">= गतिका लक्षण पहिले कह आये हैं। उसके कथन करनेको वाद कहते हैं। आचार्य परम्परासे आये हुए प्रसिद्ध अर्थका तदनुसार कथन करना अनुवाद है।</p>
<p class="HindiText">= गति का लक्षण पहिले कह आये हैं। उसके कथन करने को वाद कहते हैं। आचार्य परंपरा से आये हुए प्रसिद्ध अर्थ का तदनुसार कथन करना अनुवाद है।</p>
[[धवला]] पुस्तक संख्या  १/१,१,१११/३४९/३ तथोपदिष्टमेवानुवदनमनुवादः।....प्रसिद्धस्य कथनमनुवादः।<br>
 
<p class="HindiSentence">= जिस प्रकार उपदेश दिया है, उसी प्रकार कथन करनेको अनुवाद कहते हैं। अथवा प्रसिद्ध अर्थके अनुकूल कथन करनेको अनुवाद कहते हैं।</p>
<span class="GRef">धवला पुस्तक 1/1,1,39/265/1 </span><span class="SanskritText">अनुवदनमनुवादः ।</span>
[[Category:अ]]  
<p class="HindiText">= सूत्रके अनुकूल कथन करनेको अनुवाद कहते हैं । </p>
[[Category:धवला]]
 
<span class="GRef">धवला पुस्तक 1/1,1,111/349/3 </span><p class="SanskritText">तथोपदिष्टमेवानुवदनमनुवादः।....प्रसिद्धस्य कथनमनुवादः।</p>
<p class="HindiText">= जिस प्रकार उपदेश दिया है, उसी प्रकार कथन करने को अनुवाद कहते हैं। अथवा प्रसिद्ध अर्थ के अनुकूल कथन करने को अनुवाद कहते हैं।</p>
 
 
<noinclude>
[[ अनुलोम | पूर्व पृष्ठ ]]
 
[[ अनुवादी | अगला पृष्ठ ]]
 
</noinclude>
[[Category: अ]]
[[Category: द्रव्यानुयोग]]

Latest revision as of 21:24, 18 July 2025

धवला पुस्तक 1/1,1,24/201/4 गतिरुक्तलक्षणा, तस्याः वदनं वादः। प्रसिद्धस्याचार्यपरंपरागतस्यार्थस्य अनु पश्चात् वादोऽनुवादः।

= गति का लक्षण पहिले कह आये हैं। उसके कथन करने को वाद कहते हैं। आचार्य परंपरा से आये हुए प्रसिद्ध अर्थ का तदनुसार कथन करना अनुवाद है।

धवला पुस्तक 1/1,1,39/265/1 अनुवदनमनुवादः ।

= सूत्रके अनुकूल कथन करनेको अनुवाद कहते हैं ।

धवला पुस्तक 1/1,1,111/349/3

तथोपदिष्टमेवानुवदनमनुवादः।....प्रसिद्धस्य कथनमनुवादः।

= जिस प्रकार उपदेश दिया है, उसी प्रकार कथन करने को अनुवाद कहते हैं। अथवा प्रसिद्ध अर्थ के अनुकूल कथन करने को अनुवाद कहते हैं।



पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अनुवाद&oldid=135699"
Categories:
  • अ
  • द्रव्यानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 18 July 2025, at 21:24.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki