• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

आलोपन: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 08:36, 8 May 2009 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Latest revision as of 22:16, 17 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(10 intermediate revisions by 4 users not shown)
Line 1: Line 1:
दे. बन्ध १।
<span class="HindiText"><span class="GRef"> (षट्खंडागम  14/5, 6/सूत्र  41-63/38-46) </span></span> <span class="PrakritText">जो सो आलावणबंधो णाम तस्स इमो णिद्देसो - सेसगहाणं वा  जावाणं वा जुगाणं वा गड्डीणं वा गिल्लीणं वा रहाणं वा संदणाणं वा सिवियाणं वा  गिहाणं वा पासादाणं वा गोवुराणं वा तोरणाणं वा से कट्ठेण वा लोहेण या रज्जुणा वा  वब्भेण वा दब्भेण वा जे चामण्णे एवमादिया अण्णदव्वाणमण्णदव्वेहि आलावियाणं बंधो  होदि सो सव्वो आलावणबंधो णाम ।41।  </span><span class="GRef">( राजवार्तिक/5/24/9/488/36 )</span><br />
 
            <ol>
              <span class="HindiText"> जो '''आलापनबंध''' है  उसका यह निर्देश है - जो शकटों का, यानों का, युगों का, गड्डियों का,  गिल्लियों का, रथों का, स्यंदनों का, शिविकाओं, गृहों, प्रासादों, गोपुरों और तोरणों का काष्ट से, लोह, रस्सी, चमड़े की रस्सी और दर्भ से जो बंध होता है  तथा इनसे लेकर अन्य द्रव्यों से लालापित अन्य द्रव्यों का जो बंध होता है वह सब  आलापनबंध है ।41। </span>
              <br />
 
 
 <p class="HindiText">- अधिक जानकारी के लिए देखें [[ बंध#1.4 | बंध - 1.4]]।</p>
 
<noinclude>
[[ आलोचना | पूर्व पृष्ठ ]]
 
[[ आवंली | अगला पृष्ठ ]]
 
</noinclude>
[[Category: आ]]
[[Category: करणानुयोग]]

Latest revision as of 22:16, 17 November 2023

(षट्खंडागम 14/5, 6/सूत्र 41-63/38-46) जो सो आलावणबंधो णाम तस्स इमो णिद्देसो - सेसगहाणं वा जावाणं वा जुगाणं वा गड्डीणं वा गिल्लीणं वा रहाणं वा संदणाणं वा सिवियाणं वा गिहाणं वा पासादाणं वा गोवुराणं वा तोरणाणं वा से कट्ठेण वा लोहेण या रज्जुणा वा वब्भेण वा दब्भेण वा जे चामण्णे एवमादिया अण्णदव्वाणमण्णदव्वेहि आलावियाणं बंधो होदि सो सव्वो आलावणबंधो णाम ।41। ( राजवार्तिक/5/24/9/488/36 )

    जो आलापनबंध है उसका यह निर्देश है - जो शकटों का, यानों का, युगों का, गड्डियों का, गिल्लियों का, रथों का, स्यंदनों का, शिविकाओं, गृहों, प्रासादों, गोपुरों और तोरणों का काष्ट से, लोह, रस्सी, चमड़े की रस्सी और दर्भ से जो बंध होता है तथा इनसे लेकर अन्य द्रव्यों से लालापित अन्य द्रव्यों का जो बंध होता है वह सब आलापनबंध है ।41।
    

    - अधिक जानकारी के लिए देखें बंध - 1.4।


    पूर्व पृष्ठ

    अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=आलोपन&oldid=119487"
Categories:
  • आ
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 17 November 2023, at 22:16.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki