• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अनुदिश: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 09:18, 29 September 2022 (view source)
Sahdev (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Latest revision as of 14:39, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(3 intermediate revisions by 3 users not shown)
Line 1: Line 1:


== सिद्धांतकोष से ==
== सिद्धांतकोष से ==
<p class="SanskritText">राजवार्तिक अध्याय 4/19,5/225/1 किमनुदिशमिति। प्रतिदिशमित्यर्थः। </p>
<span class="GRef">राजवार्तिक अध्याय 4/19,5/225/1</span> <p class="SanskritText">किमनुदिशमिति। प्रतिदिशमित्यर्थः। </p>
<p class="HindiText"> <b>प्रश्न</b> - अनुदिशसे क्या तात्पर्य है?  <br>
<p class="HindiText"> <b>प्रश्न</b> - अनुदिश से क्या तात्पर्य है?  <br>
<b>उत्तर</b> - अनुदिश अर्थात् प्रत्येक दिशामें वर्तमान विमान। अर्थात् जो प्रत्येक आठ दिशाओं में पाये जायें, वे अनुदिश हैं। <br>
<b>उत्तर</b> - अनुदिश अर्थात् प्रत्येक दिशा में वर्तमान विमान। अर्थात् जो प्रत्येक आठ दिशाओं में पाये जायें, वे अनुदिश हैं। <br>
क्योंकि अनुदिश विमान एक मध्यमें है तथा दिशाओं व विदिशाओं में आठ हैं। अतः इन विमानों को अनुदिश कहते हैं। <br>
क्योंकि अनुदिश विमान एक मध्य में है तथा दिशाओं व विदिशाओं में आठ हैं। अतः इन विमानों को अनुदिश कहते हैं। <br>
 
2. कल्पातीत स्वर्गों का एक भेद. - देखें [[ स्वर्ग#5.2 | स्वर्ग - 5.2]]।</p>
2. कल्पातीत स्वर्गों का एक भेद. - देखें [[ स्वर्ग#5.2 | स्वर्ग - 5.2]]।</p>
   
   
Line 19: Line 20:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p id="1"> (1) ग्रैवेयक और अनुत्तर विमानों के मध्य स्थित नौ विमान । <br>
<div class="HindiText">  <p id="1" class="HindiText"> (1) ग्रैवेयक और अनुत्तर विमानों के मध्य स्थित नौ विमान ।इनके नाम है― 1. आदित्य, 2. अर्चि 3. अर्चिमालिनी 4. वज्र 5. वैरोचन 6. सौम्य 7. सौम्यरूपक 8. अंक और 9. स्फुटिक । <br>इन विमानों के निवासी देव कल्पातीत कहे जाते हैं । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_3#150|हरिवंशपुराण - 3.150]], [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_6#39|6.39-40]] , [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_6#63|63-64]]  </span></p>
इनके नाम है― 1. आदित्य, 2. अर्चि 3. अर्चिमालिनी 4. वज्र 5. वैरोचन 6. सौम्य 7. सौम्यरूपक 8. अंक और 9. स्फुटिक । इन विमानों के निवासी देव कल्पातीत कहे जाते हैं । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 3.150, 6.39-40, 63-64 </span></p>
<p id="2" class="HindiText">(2) समवसरण मे स्थित नौ स्तूप । इन स्तूपों में सभी अनुदिश विमान प्रत्यक्ष दिखते हैं । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_57#101|हरिवंशपुराण - 57.101]] </span></p>
<p id="2">(2) समवसरण मे स्थित नौ स्तूप । इन स्तूपों में सभी अनुदिश विमान प्रत्यक्ष दिखते हैं । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 57.101 </span></p>
<p id="3" class="HindiText">(3) कठिन तप से प्राप्य अच्युत एवं आनत स्वर्गों का इस नाम का एक विमान । रानी सुप्रभा इसी विमान में देव हुई थी । <span class="GRef"> महापुराण 7.44,63-24 </span></p>
<p id="3">(3) कठिन तप से प्राप्य अच्युत एवं आनत स्वर्गों का इस नाम का एक विमान । रानी सुप्रभा इसी विमान में देव हुई थी । <span class="GRef"> महापुराण 7.44,63-24 </span></p>
   </div>
   </div>


Line 34: Line 34:
[[Category: अ]]
[[Category: अ]]
[[Category: करणानुयोग]]
[[Category: करणानुयोग]]
[[Category: प्रथमानुयोग]]

Latest revision as of 14:39, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

राजवार्तिक अध्याय 4/19,5/225/1

किमनुदिशमिति। प्रतिदिशमित्यर्थः।

प्रश्न - अनुदिश से क्या तात्पर्य है?
उत्तर - अनुदिश अर्थात् प्रत्येक दिशा में वर्तमान विमान। अर्थात् जो प्रत्येक आठ दिशाओं में पाये जायें, वे अनुदिश हैं।
क्योंकि अनुदिश विमान एक मध्य में है तथा दिशाओं व विदिशाओं में आठ हैं। अतः इन विमानों को अनुदिश कहते हैं।
2. कल्पातीत स्वर्गों का एक भेद. - देखें स्वर्ग - 5.2।



पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) ग्रैवेयक और अनुत्तर विमानों के मध्य स्थित नौ विमान ।इनके नाम है― 1. आदित्य, 2. अर्चि 3. अर्चिमालिनी 4. वज्र 5. वैरोचन 6. सौम्य 7. सौम्यरूपक 8. अंक और 9. स्फुटिक ।
इन विमानों के निवासी देव कल्पातीत कहे जाते हैं । हरिवंशपुराण - 3.150, 6.39-40 , 63-64

(2) समवसरण मे स्थित नौ स्तूप । इन स्तूपों में सभी अनुदिश विमान प्रत्यक्ष दिखते हैं । हरिवंशपुराण - 57.101

(3) कठिन तप से प्राप्य अच्युत एवं आनत स्वर्गों का इस नाम का एक विमान । रानी सुप्रभा इसी विमान में देव हुई थी । महापुराण 7.44,63-24


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अनुदिश&oldid=123283"
Categories:
  • अ
  • पुराण-कोष
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 14:39.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki