• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अपवर्तन: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 21:21, 17 October 2022 (view source)
Shilpa jain (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Revision as of 20:48, 15 November 2022 (view source)
Shilpa jain (talk | contribs)
No edit summary
Newer edit →
Line 27: Line 27:
</noinclude>
</noinclude>
[[Category: अ]]
[[Category: अ]]
[[Category: करणानुयोग]]

Revision as of 20:48, 15 November 2022



1. अपवर्तनाघात सामान्यका लक्षण

सर्वार्थसिद्धि अध्याय 2/53/201 बाह्यस्योपघातनिमित्तस्य विषशस्त्रादेः सति संनिधाने ह्रस्वं भवतीत्यपवर्त्यम्।

= उपघात के निमित्त विष शस्त्रादिक बाह्य निमित्तों के मिलने पर जो आयु घट जाती है वह अपवर्त्य आयु कहलाती है।

कषायपाहुड़ पुस्तक 1,18/$315/347/5 किमोवट्टणं णाम। णवुंसयवेए खविदे सेसणोकसायक्खवणमोवट्टणं णाम।

= प्रश्न-अपवर्तना किसे कहते हैं। उत्तर-नपुंसकवेद का क्षपण हो जाने पर शेष नोकषायों के क्षपण होने को यहाँ अपवर्तना कहा है।

गोम्मट्टसार कर्मकांड / जीव तत्त्व प्रदीपिका टीका गाथा 643/837/16 आयुर्बंधं कुर्वतां जीवानां परिणामवशेन बध्यामानस्यायुषोऽपवर्तनमपि भवति तदेवापवर्तनघात इत्युच्यते, उदीयमानायुरपवर्तनस्यैव कदलीघाताभिधानात्।

= आयुके बंध को करते जीव तिनि कै परिणामनि के वश तै बध्यमान आयु का अपवर्तन भी होता है। अपवर्तन नाम घटने का है, सो याकौ अपवर्तनघात कहिए, जातैं उदय आई (भुज्यमान) आयु कै अपवर्तन का नाम कदलीघात है। (अर्थात् भुज्यमान आयुके घटने का नाम कदलीघात और बध्यमान आयु के घटने का नाम अपवर्तनघात है।)

2. अनुसमयापवर्तनाका लक्षण

कषायपाहुड़ पुस्तक 5/4-22/$627/396/13 का अणुसमओवट्टणा। उदय-उदयावलियासु पविस्समाणट्टिदीणमणुभागस्स उदयावलिबाहिरट्ठिदीणमणुभागस्स य समयं पडि अपंतगुणहीणकमेण घादो।

= प्रश्न-प्रतिसमय अपवर्तना किसे कहते हैं। उत्तर-उदय और उदयावलि में प्रवेश करने वाली स्थितियों के अनुभाग का तथा उदयावली से बाहर की स्थितियों के अनुभाग जो प्रति समय अनंतगुणहीन क्रम से घात होता है उसे प्रतिसमय अपवर्तना कहते हैं।

धवला पुस्तक 12/4,2,7,41/12/32/2 उक्कीरणकालेण विणा एगसमएणेव पददि सा अणुसमओवट्टणा। अण्णं च, अणुसमओवट्टणाए णियमेण अणंताभागा हम्मंति।

= उत्कीरणकाल के बिना, एक समय द्वारा जो घात होता है वह अनुसमयापवर्तना है। अथवा अनुसमयापवर्तनामें नियम से अनंत बहुभाग नष्ट होता है। (अर्थात् एक समय में ही अनंतों कांडकोंका युगपत् घात करना अनुसमयापवर्तना है।)

• अनुसमयापवर्तना व कांडकघातमें अंतर-देखें अपकर्षण - 4.6।

• आयुके अपवर्तन संबंधी-देखें आयु - 5।

• अकाल मृत्यु वश आयुका अपवर्तन-देखें मरण - 4।

• अपवर्तनोद्वर्तन-देखें अश्वकर्ण करण ।

3. गणितके संबंधमें अपवर्तन

अमान मूल्योंमें बदलना जैसे 18/72=1/4-देखें गणित - II.1.10।



पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अपवर्तन&oldid=103731"
Categories:
  • अ
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 15 November 2022, at 20:48.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki