• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

टोडरमल: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 16:47, 4 March 2023 (view source)
Sunehanayak (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Revision as of 21:14, 4 March 2023 (view source)
Sunehanayak (talk | contribs)
No edit summary
Newer edit →
Line 1: Line 1:
<p class="HindiText">नगर-जयपुर, पिता का नाम-जोगीदास, माता का नाम-रंभादेवी, गोत्र-गोदीका  (बड़जातीया), जाति-खंडेलवाल, पंथ-तेरापंथ, गुरु-वंशीधर थे। व्यवसाय-साहूकारी  था। जैन आम्नाय में आप अपने समय में एक क्रांतिकारी पंडित हुए हैं। आपके दो  पुत्र थे हरिचंद व गुमानीराम। आपने निम्न रचनाएँ की हैं–</p>
<p class="HindiText">नगर-जयपुर, पिता का नाम-जोगीदास, माता का नाम-रंभादेवी, गोत्र-गोदीका  (बड़जातीया), जाति-खंडेलवाल, पंथ-तेरापंथ, गुरु-वंशीधर थे। व्यवसाय-साहूकारी  था। जैन आम्नाय में आप अपने समय में एक क्रांतिकारी पंडित हुए हैं। आपके दो  पुत्र थे हरिचंद व गुमानीराम। आपने निम्न रचनाएँ की हैं–</p>
</div>
</div>
<div class="right-image">[[File:टोडरमल.jpg|300px|टोडरमल]]</div>
<div class="image-with-content_image-box_right">[[File:टोडरमल.jpg|300px|टोडरमल]]</div>
</div>
</div>
<ol>
<ol>

Revision as of 21:14, 4 March 2023



नगर-जयपुर, पिता का नाम-जोगीदास, माता का नाम-रंभादेवी, गोत्र-गोदीका (बड़जातीया), जाति-खंडेलवाल, पंथ-तेरापंथ, गुरु-वंशीधर थे। व्यवसाय-साहूकारी था। जैन आम्नाय में आप अपने समय में एक क्रांतिकारी पंडित हुए हैं। आपके दो पुत्र थे हरिचंद व गुमानीराम। आपने निम्न रचनाएँ की हैं–

टोडरमल
  1. गोमट्टसार;
  2. लब्धिसार;
  3. क्षपणासार;
  4. त्रिलोकसार;
  5. आत्मानुशासन,
  6. पुरुषार्थ सिद्धयुपाय–इन छह ग्रंथों की टीकाएँ।
  7. गोमट्टसार व लब्धिसार की अर्थ संदृष्टियाँ,
  8. गोम्मट्टसार पूजा,
  9. मोक्षमार्ग प्रकाशक;
  10. रहस्यपूर्ण चिट्ठी। आप शास्त्र रचना में इतने संलग्न रहते थे कि 6 महीने तक, जब तक कि गोम्मट्टसार की टीका पूर्ण न हो गयी, आपको यह भी भान न हुआ माता भोजन में नमक नहीं डालती है। आप अत्यंत विरक्त थे। उनकी विद्वत्ता व अजेय तर्कों से चिड़कर किसी विद्वेषी ने राजा से उनकी चुगली खायी। फलस्वरूप केवल 32 वर्ष की आयु में उन्हें हाथी के पाँव के तले रौंदकर मार डालने का दंड दिया गया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार ही न किया बल्कि इस पापकार्य में प्रवृत्ति न करते हुए हाथी को स्वयं संबोधकर प्रवृत्ति भी करायी। समय–जन्म वि.1797, मृत्यु वि.1824 (ई.1740-1767)। ( मोक्षमार्ग प्रकाशक/ प्र.9/पं.परमानंद जी शास्त्री), (ती./4/283)।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=टोडरमल&oldid=111207"
Categories:
  • ट
  • इतिहास
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 4 March 2023, at 21:14.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki