• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

शिखरी: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 12:13, 28 June 2023 (view source)
Jainusha (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Latest revision as of 15:25, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
Line 18: Line 18:
== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<div        align="justify"
<div        align="justify"
  class="HindiText">  <p> जंबूद्वीप में पूर्व-पश्चिम लंबा छठा कुलाचल। यह पर्वत हेममय है। इसके क्रमश: ग्यारह कूट है― (1) सिद्धायतनकूट (2) शिखरिकूट (3) हैरण्यवतकूट (4) सुरदेवीकूट (5) रक्ताकूट (6) लक्ष्मीकूट (7) सुवर्णकूट (8) रक्तवतीकूट (9) गंधदेवीकूट (10) ऐरावतकूट और (11) मणिकांचनकूट । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.105-108,  </span>देखें [[ कुलपर्वत ]]</p>
  class="HindiText">  <p> जंबूद्वीप में पूर्व-पश्चिम लंबा छठा कुलाचल। यह पर्वत हेममय है। इसके क्रमश: ग्यारह कूट है― (1) सिद्धायतनकूट (2) शिखरिकूट (3) हैरण्यवतकूट (4) सुरदेवीकूट (5) रक्ताकूट (6) लक्ष्मीकूट (7) सुवर्णकूट (8) रक्तवतीकूट (9) गंधदेवीकूट (10) ऐरावतकूट और (11) मणिकांचनकूट । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_5#105|हरिवंशपुराण - 5.105-108]],  </span>देखें [[ कुलपर्वत ]]</p>
   </div>
   </div>



Latest revision as of 15:25, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

  1. जिसके शिखर अर्थात् कूट हो उसकी शिखरी संज्ञा है। यह रूढ संज्ञा है जैसे कि मोर की शिखंडी संज्ञा रूढ है। यह ऐरावत क्षेत्र के दक्षिण में स्थित पूर्वा पर लंबायमान वर्षधर पर्वत है। विशेष - देखें लोक - 5.3।
  2. शिखरी पर्वतस्थ ग्यारह कूटो में से दूसरे कूट व उसका स्वामी देव - देखें लोक - 5.4.9।
  3. पद्म द्रह में स्थित एक कूट - देखें लोक - 5.7।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

पुराणकोष से

जंबूद्वीप में पूर्व-पश्चिम लंबा छठा कुलाचल। यह पर्वत हेममय है। इसके क्रमश: ग्यारह कूट है― (1) सिद्धायतनकूट (2) शिखरिकूट (3) हैरण्यवतकूट (4) सुरदेवीकूट (5) रक्ताकूट (6) लक्ष्मीकूट (7) सुवर्णकूट (8) रक्तवतीकूट (9) गंधदेवीकूट (10) ऐरावतकूट और (11) मणिकांचनकूट । हरिवंशपुराण - 5.105-108, देखें कुलपर्वत


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=शिखरी&oldid=129368"
Categories:
  • श
  • करणानुयोग
  • पुराण-कोष
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:25.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki