• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अभयनंदि: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 09:47, 25 August 2008 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
(New page: नन्दिसंघ देशीयगण (दे.इति/७/५) के अनुसार आप इन्द्रनन्दि और नेमिचन्द्र सिद...)
 
Revision as of 01:04, 8 May 2009 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
No edit summary
Newer edit →
Line 1: Line 1:
नन्दिसंघ देशीयगण (दे.इति/७/५) के अनुसार आप इन्द्रनन्दि और नेमिचन्द्र सिद्धान्त चक्रवर्ती (ई.श. १०-११) के समवयस्क दीक्षागुरु और वीर नन्दिके शिक्षागुरु थे। आपको क्योंकि सिद्धान्तचक्रवर्तीकी उपाधि प्राप्त थी इसलिए इन तीनों शिष्योंको भी वह सहज मिल गई। इन तीनोंमें आचार्य वीरनन्दि पहिले आ. मेघचन्द्रके शिष्य थे, पीछे विशेष ज्ञान प्राप्तिके अर्थ आपकी शरणमें चले गये थे। कृतियें-१. बिना संदृष्टिकी गोमट्टसार टीका; २. कर्मप्रकृति रहस्य; ३. तत्त्वार्थ सूत्रकी तात्पर्य वृत्ति टीका, ४. श्रेयोविधा; ५. पूजाकल्प; ६. पं. कैलाशचन्दजी के अनुसार सम्भवतः जैनेन्द्र व्याकरणकी महावृत्ति टीका भी। समय-व्याकरण महावृत्तिके अनुसार वि. श. ११ का प्रथम चरण आता है। देशीयगणकी गुर्वावलीमें वह ई. ९३०-९५० दर्शाया गया है।<br>(जै./१/३८७); ([[तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परंपरा]], पृष्ठ संख्या २/४१९); (इतिहास ७/५) (जैन साहित्य इतिहास/२७०/नाथूरामजी प्रेमी)।<br>[[Category:अ]] <br>[[Category:जैन साहित्य इतिहास]] <br>[[Category:तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परंपरा]] <br>
नन्दिसंघ देशीयगण (दे.इति/७/५) के अनुसार आप इन्द्रनन्दि और नेमिचन्द्र सिद्धान्त चक्रवर्ती (ई.श. १०-११) के समवयस्क दीक्षागुरु और वीर नन्दिके शिक्षागुरु थे। आपको क्योंकि सिद्धान्तचक्रवर्तीकी उपाधि प्राप्त थी इसलिए इन तीनों शिष्योंको भी वह सहज मिल गई। इन तीनोंमें आचार्य वीरनन्दि पहिले आ. मेघचन्द्रके शिष्य थे, पीछे विशेष ज्ञान प्राप्तिके अर्थ आपकी शरणमें चले गये थे। कृतियें-१. बिना संदृष्टिकी गोमट्टसार टीका; २. कर्मप्रकृति रहस्य; ३. तत्त्वार्थ सूत्रकी तात्पर्य वृत्ति टीका, ४. श्रेयोविधा; ५. पूजाकल्प; ६. पं. कैलाशचन्दजी के अनुसार सम्भवतः जैनेन्द्र व्याकरणकी महावृत्ति टीका भी। समय-व्याकरण महावृत्तिके अनुसार वि. श. ११ का प्रथम चरण आता है। देशीयगणकी गुर्वावलीमें वह ई. ९३०-९५० दर्शाया गया है।<br>
(जै./१/३८७); ([[तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परंपरा]], पृष्ठ संख्या २/४१९); (इतिहास ७/५) (जैन साहित्य इतिहास/२७०/नाथूरामजी प्रेमी)।<br>
[[Category:अ]]  
[[Category:जैन साहित्य इतिहास]]  
[[Category:तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परंपरा]]

Revision as of 01:04, 8 May 2009

नन्दिसंघ देशीयगण (दे.इति/७/५) के अनुसार आप इन्द्रनन्दि और नेमिचन्द्र सिद्धान्त चक्रवर्ती (ई.श. १०-११) के समवयस्क दीक्षागुरु और वीर नन्दिके शिक्षागुरु थे। आपको क्योंकि सिद्धान्तचक्रवर्तीकी उपाधि प्राप्त थी इसलिए इन तीनों शिष्योंको भी वह सहज मिल गई। इन तीनोंमें आचार्य वीरनन्दि पहिले आ. मेघचन्द्रके शिष्य थे, पीछे विशेष ज्ञान प्राप्तिके अर्थ आपकी शरणमें चले गये थे। कृतियें-१. बिना संदृष्टिकी गोमट्टसार टीका; २. कर्मप्रकृति रहस्य; ३. तत्त्वार्थ सूत्रकी तात्पर्य वृत्ति टीका, ४. श्रेयोविधा; ५. पूजाकल्प; ६. पं. कैलाशचन्दजी के अनुसार सम्भवतः जैनेन्द्र व्याकरणकी महावृत्ति टीका भी। समय-व्याकरण महावृत्तिके अनुसार वि. श. ११ का प्रथम चरण आता है। देशीयगणकी गुर्वावलीमें वह ई. ९३०-९५० दर्शाया गया है।
(जै./१/३८७); (तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परंपरा, पृष्ठ संख्या २/४१९); (इतिहास ७/५) (जैन साहित्य इतिहास/२७०/नाथूरामजी प्रेमी)।

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अभयनंदि&oldid=5004"
Categories:
  • अ
  • जैन साहित्य इतिहास
  • तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परंपरा
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 8 May 2009, at 01:04.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki