• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अंगोपांग: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 22:38, 22 July 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Revision as of 16:18, 19 August 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
Newer edit →
Line 1: Line 1:
<p class="SanskritText">- सर्वार्थसिद्धि अध्याय 8/11/389 यदुदपादङ्गोपाङ्गविवेकस्तदङ्गोपाङ्गनाम। </p>
<p class="SanskritText">- सर्वार्थसिद्धि अध्याय 8/11/389 यदुदपादंगोपांगविवेकस्तदंगोपांगनाम। </p>
<p class="HindiText">= जिसके उदयसे अंगोपांग का भेद होता है वह अंगोपांग नाम कर्म है।</p>
<p class="HindiText">= जिसके उदयसे अंगोपांग का भेद होता है वह अंगोपांग नाम कर्म है।</p>
<p class="SanskritText">धवला पुस्तक 6/1,9-1,28/54/2 जस्स कम्मखंधस्सुदएण सरीरस्संगोवंगणिप्फत्ती होज्ज तस्स कम्मक्खंधस्स सरीरअंगोवंगणाम। </p>
<p class="SanskritText">धवला पुस्तक 6/1,9-1,28/54/2 जस्स कम्मखंधस्सुदएण सरीरस्संगोवंगणिप्फत्ती होज्ज तस्स कम्मक्खंधस्स सरीरअंगोवंगणाम। </p>
<p class="HindiText">= जिस कर्म स्कन्ध के उदय से शरीर के अंग और उपांगों की निष्पत्ति होती है, उस कर्म स्कन्ध का शरीरांगोपांग यह नाम है। </p>
<p class="HindiText">= जिस कर्म स्कंध के उदय से शरीर के अंग और उपांगों की निष्पत्ति होती है, उस कर्म स्कंध का शरीरांगोपांग यह नाम है। </p>
<p>( धवला पुस्तक 13/5,5,101/364/4) ( गोम्मट्टसार जीवकाण्ड / गोम्मट्टसार जीवकाण्ड जीव तत्त्व प्रदीपिका| जीव तत्त्व प्रदीपिका  टीका गाथा 33/29/5)</p>
<p>( धवला पुस्तक 13/5,5,101/364/4) ( गोम्मट्टसार जीवकांड / गोम्मट्टसार जीवकांड जीव तत्त्व प्रदीपिका| जीव तत्त्व प्रदीपिका  टीका गाथा 33/29/5)</p>
<p>2. अंगोपांग नामकर्म के भेद</p>
<p>2. अंगोपांग नामकर्म के भेद</p>
<p class="SanskritText">षट्खण्डागम पुस्तक 6/1,9-1/सू.35/72 जं सरीरअंगोवंगणामकम्मं तं तिविहं ओरालियसरीरअंगोवगणामं वेउव्वियसरीरअंगोवंगणामं, आहारसरीरअंगोवंगणामं चेदि ॥ 35 ॥ </p>
<p class="SanskritText">षट्खंडागम पुस्तक 6/1,9-1/सू.35/72 जं सरीरअंगोवंगणामकम्मं तं तिविहं ओरालियसरीरअंगोवगणामं वेउव्वियसरीरअंगोवंगणामं, आहारसरीरअंगोवंगणामं चेदि ॥ 35 ॥ </p>
<p class="HindiText">= अंगोपांग नामकर्म तीन प्रकार का है - औदारिकशरीर अंगोपांग नामकर्म, वैक्रियक शरीर अंगोपांग नामकर्म और आहारकशरीर अंगोपांग नामकर्म। </p>
<p class="HindiText">= अंगोपांग नामकर्म तीन प्रकार का है - औदारिकशरीर अंगोपांग नामकर्म, वैक्रियक शरीर अंगोपांग नामकर्म और आहारकशरीर अंगोपांग नामकर्म। </p>
<p>( षट्खण्डागम पुस्तक 13/5,5/ सू. 109/369) (पंचसंग्रह / प्राकृत / अधिकार 2/4/47) ( सर्वार्थसिद्धि अध्याय 8/11/389) (राजवार्तिक अध्याय 8/11/4/576/19) ( गोम्मट्टसार कर्मकाण्ड / जीव तत्त्व प्रदीपिका टीका गाथा 27/22); ( गोम्मट्टसार कर्मकाण्ड / जीव तत्त्व प्रदीपिका टीका गाथा 33/29)</p>
<p>( षट्खंडागम पुस्तक 13/5,5/ सू. 109/369) (पंचसंग्रह / प्राकृत / अधिकार 2/4/47) ( सर्वार्थसिद्धि अध्याय 8/11/389) (राजवार्तिक अध्याय 8/11/4/576/19) ( गोम्मट्टसार कर्मकांड / जीव तत्त्व प्रदीपिका टीका गाथा 27/22); ( गोम्मट्टसार कर्मकांड / जीव तत्त्व प्रदीपिका टीका गाथा 33/29)</p>
<p>• अंगोपांग प्रकृति की बन्ध, उदय, सत्त्व प्ररूपणाएँ व तत्सम्बन्धी नियमादि - देखें [[ वह वह नाम ]]।</p>
<p>• अंगोपांग प्रकृति की बंध, उदय, सत्त्व प्ररूपणाएँ व तत्संबंधी नियमादि - देखें [[ वह वह नाम ]]।</p>
<p>3. शरीर के अंगोपांगों के नाम निर्देश</p>
<p>3. शरीर के अंगोपांगों के नाम निर्देश</p>
<p class="SanskritText">पंचसंग्रह / प्राकृत / अधिकार /1/16 णलयाबाहू य तहा णियंवपुट्ठी उरो य सीसं च। अट्ठे व दु अंगाइं देहण्णाइं उवंगाइं ॥ 10 ॥ </p>
<p class="SanskritText">पंचसंग्रह / प्राकृत / अधिकार /1/16 णलयाबाहू य तहा णियंवपुट्ठी उरो य सीसं च। अट्ठे व दु अंगाइं देहण्णाइं उवंगाइं ॥ 10 ॥ </p>
<p class="HindiText">= शरीर में दो हाथ, दो पैर, नितम्ब (कमर के पीछे का भाग), पीठ, हृदय, और मस्तक ये आठ अंग होते हैं। इनके सिवाय अन्य (नाक, कान, आँख आदि) उपांग होते हैं। </p>
<p class="HindiText">= शरीर में दो हाथ, दो पैर, नितंब (कमर के पीछे का भाग), पीठ, हृदय, और मस्तक ये आठ अंग होते हैं। इनके सिवाय अन्य (नाक, कान, आँख आदि) उपांग होते हैं। </p>
<p>( धवला पुस्तक 6/1,9-1,28/गा. 10/54) ( गोम्मट्टसार जीवकाण्ड / मूल गाथा 28)</p>
<p>( धवला पुस्तक 6/1,9-1,28/गा. 10/54) ( गोम्मट्टसार जीवकांड / मूल गाथा 28)</p>
<p class="SanskritText">धवला पुस्तक 6/1,9-1,28/54/7 शिरसि तावदुपाङ्गानि मूर्द्ध-करोटि-मस्तक-ललाट-शङ्ख-भ्र-कर्ण-नासिका-नयनाक्षिकूट-हनु-कपोल-उत्तराधरोष्ठ-सृक्वणी-तालु-जिह्वादीनि। </p>
<p class="SanskritText">धवला पुस्तक 6/1,9-1,28/54/7 शिरसि तावदुपांगानि मूर्द्ध-करोटि-मस्तक-ललाट-शंख-भ्र-कर्ण-नासिका-नयनाक्षिकूट-हनु-कपोल-उत्तराधरोष्ठ-सृक्वणी-तालु-जिह्वादीनि। </p>
<p class="HindiText">= शिरमें मूर्धा, कपाल, मस्तक, ललाट, शंख, भौंह, कान, नाक, आँख, अक्षिकूट, हनु (ठुड्डी), कपोल, ऊपर और नीचे के ओष्ठ, सृक्वणी (चाप), तालु और जीभ आदि उपांग होते हैं।</p>
<p class="HindiText">= शिरमें मूर्धा, कपाल, मस्तक, ललाट, शंख, भौंह, कान, नाक, आँख, अक्षिकूट, हनु (ठुड्डी), कपोल, ऊपर और नीचे के ओष्ठ, सृक्वणी (चाप), तालु और जीभ आदि उपांग होते हैं।</p>
<p>• एकेन्द्रियों में अंगोपांग नहीं होते व तत्सम्बन्धी शंका - देखें [[ उदय#5 | उदय - 5]]।</p>
<p>• एकेंद्रियों में अंगोपांग नहीं होते व तत्संबंधी शंका - देखें [[ उदय#5 | उदय - 5]]।</p>
<p>• हीनाधिक अंगोपांगवाला व्यक्ति प्रवज्या के अयोग्य है - देखें [[ प्रव्रज्या ]]।</p>
<p>• हीनाधिक अंगोपांगवाला व्यक्ति प्रवज्या के अयोग्य है - देखें [[ प्रव्रज्या ]]।</p>
   
   

Revision as of 16:18, 19 August 2020



- सर्वार्थसिद्धि अध्याय 8/11/389 यदुदपादंगोपांगविवेकस्तदंगोपांगनाम।

= जिसके उदयसे अंगोपांग का भेद होता है वह अंगोपांग नाम कर्म है।

धवला पुस्तक 6/1,9-1,28/54/2 जस्स कम्मखंधस्सुदएण सरीरस्संगोवंगणिप्फत्ती होज्ज तस्स कम्मक्खंधस्स सरीरअंगोवंगणाम।

= जिस कर्म स्कंध के उदय से शरीर के अंग और उपांगों की निष्पत्ति होती है, उस कर्म स्कंध का शरीरांगोपांग यह नाम है।

( धवला पुस्तक 13/5,5,101/364/4) ( गोम्मट्टसार जीवकांड / गोम्मट्टसार जीवकांड जीव तत्त्व प्रदीपिका| जीव तत्त्व प्रदीपिका टीका गाथा 33/29/5)

2. अंगोपांग नामकर्म के भेद

षट्खंडागम पुस्तक 6/1,9-1/सू.35/72 जं सरीरअंगोवंगणामकम्मं तं तिविहं ओरालियसरीरअंगोवगणामं वेउव्वियसरीरअंगोवंगणामं, आहारसरीरअंगोवंगणामं चेदि ॥ 35 ॥

= अंगोपांग नामकर्म तीन प्रकार का है - औदारिकशरीर अंगोपांग नामकर्म, वैक्रियक शरीर अंगोपांग नामकर्म और आहारकशरीर अंगोपांग नामकर्म।

( षट्खंडागम पुस्तक 13/5,5/ सू. 109/369) (पंचसंग्रह / प्राकृत / अधिकार 2/4/47) ( सर्वार्थसिद्धि अध्याय 8/11/389) (राजवार्तिक अध्याय 8/11/4/576/19) ( गोम्मट्टसार कर्मकांड / जीव तत्त्व प्रदीपिका टीका गाथा 27/22); ( गोम्मट्टसार कर्मकांड / जीव तत्त्व प्रदीपिका टीका गाथा 33/29)

• अंगोपांग प्रकृति की बंध, उदय, सत्त्व प्ररूपणाएँ व तत्संबंधी नियमादि - देखें वह वह नाम ।

3. शरीर के अंगोपांगों के नाम निर्देश

पंचसंग्रह / प्राकृत / अधिकार /1/16 णलयाबाहू य तहा णियंवपुट्ठी उरो य सीसं च। अट्ठे व दु अंगाइं देहण्णाइं उवंगाइं ॥ 10 ॥

= शरीर में दो हाथ, दो पैर, नितंब (कमर के पीछे का भाग), पीठ, हृदय, और मस्तक ये आठ अंग होते हैं। इनके सिवाय अन्य (नाक, कान, आँख आदि) उपांग होते हैं।

( धवला पुस्तक 6/1,9-1,28/गा. 10/54) ( गोम्मट्टसार जीवकांड / मूल गाथा 28)

धवला पुस्तक 6/1,9-1,28/54/7 शिरसि तावदुपांगानि मूर्द्ध-करोटि-मस्तक-ललाट-शंख-भ्र-कर्ण-नासिका-नयनाक्षिकूट-हनु-कपोल-उत्तराधरोष्ठ-सृक्वणी-तालु-जिह्वादीनि।

= शिरमें मूर्धा, कपाल, मस्तक, ललाट, शंख, भौंह, कान, नाक, आँख, अक्षिकूट, हनु (ठुड्डी), कपोल, ऊपर और नीचे के ओष्ठ, सृक्वणी (चाप), तालु और जीभ आदि उपांग होते हैं।

• एकेंद्रियों में अंगोपांग नहीं होते व तत्संबंधी शंका - देखें उदय - 5।

• हीनाधिक अंगोपांगवाला व्यक्ति प्रवज्या के अयोग्य है - देखें प्रव्रज्या ।



पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अंगोपांग&oldid=55763"
Category:
  • अ
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 19 August 2020, at 16:18.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki