• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अंजन: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 11:32, 24 May 2009 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Revision as of 13:41, 5 May 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
Newer edit →
Line 1: Line 1:
== सिद्धांतकोष से ==
<OL start=1 class="HindiNumberList"> <LI>  सानत्कुमार स्वर्ग का प्रथम पटल व इन्द्रक  - <b>देखे </b>[[स्वर्ग]] ५/३।  </LI>  
<OL start=1 class="HindiNumberList"> <LI>  सानत्कुमार स्वर्ग का प्रथम पटल व इन्द्रक  - <b>देखे </b>[[स्वर्ग]] ५/३।  </LI>  
<LI>  पूर्व विदेहस्थ एक वक्षार, उसका कूट व रक्षक देव  - <b>देखे </b>[[लोक]] ५/३।  </LI>
<LI>  पूर्व विदेहस्थ एक वक्षार, उसका कूट व रक्षक देव  - <b>देखे </b>[[लोक]] ५/३।  </LI>
Line 4: Line 5:
<LI>  रुचक पर्वतस्थ एक कूट - <b>देखे </b>[[लोक]] ५/१३। ५. मानुषोत्तर पर्वतस्थ एक कूट - <b>देखे </b>[[लोक]] ५/१०। </LI> </OL>
<LI>  रुचक पर्वतस्थ एक कूट - <b>देखे </b>[[लोक]] ५/१३। ५. मानुषोत्तर पर्वतस्थ एक कूट - <b>देखे </b>[[लोक]] ५/१०। </LI> </OL>
[[Category:अ]]
[[Category:अ]]
== पुराणकोष से ==
<p id="1">(1) पूर्व विदेह क्षेत्र का एक वक्षार पर्वत । यह सीता नदी से निषद्य कुलाचल तक विस्तृत है । महापुराण 63. 201-203, हरिवंशपुराण 5.228-229</p>
<p id="2">(2) सानत्‍कुमार और माहेन्द्र कल्पों का प्रथम पटल और इन्द्रक विमान । हरिवंशपुराण 6.48 दे9 सानत्कुमार</p>
<p id="3">(3) रुचकवर पर्वत का सातवाँ कूट । यहाँ आनन्दा देवी रहती है । हरिवंशपुराण 5.703 [[ रुचकवर | देखें रुचकवर ]]</p>
<p id="4">(4) प्रथम नरकभूमि रत्‍नप्रभा के खरभाग का दसवाँ पटल । हरिवंशपुराण 4.52-54 [[ खरभाग | देखें खरभाग ]]</p>
<p id="5">(5) एक जनपद । तीर्थंकर नेमिनाथ विहार करते हुए यहाँ आये थे । हरिवंशपुराण 59.109-111</p>
<p id="6">(6) सुमेरु पर्वत के पाण्डुक वन का एक भवन । इसकी चौड़ाई और परिधि पैंतालीस योजन है । हरिवंशपुराण 5.316, 319-322</p>
<p id="7">(7) मध्यलोक के सोलहवें द्वीप और सागर के आगे असंख्यात द्वीपों और सागरों में पाँचवाँ द्वीप एवं सागर । हरिवंशपुराण 5.622-626 </p>
<p id="8">(8) आँखों का सौन्दर्य-प्रसाधन । महापुराण 14.9</p>
<noinclude>
[[ अंगुल | पूर्व पृष्ठ ]]
[[ अंजनक | अगला पृष्ठ ]]
</noinclude>
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: अ]]

Revision as of 13:41, 5 May 2020

== सिद्धांतकोष से ==

  1. सानत्कुमार स्वर्ग का प्रथम पटल व इन्द्रक - देखे स्वर्ग ५/३।
  2. पूर्व विदेहस्थ एक वक्षार, उसका कूट व रक्षक देव - देखे लोक ५/३।
  3. पूर्व विदेहस्थ वैश्रवण वक्षारका एक कूट व उसका रक्षक देव - देखे लोक ५/४।
  4. रुचक पर्वतस्थ एक कूट - देखे लोक ५/१३। ५. मानुषोत्तर पर्वतस्थ एक कूट - देखे लोक ५/१०।

पुराणकोष से

(1) पूर्व विदेह क्षेत्र का एक वक्षार पर्वत । यह सीता नदी से निषद्य कुलाचल तक विस्तृत है । महापुराण 63. 201-203, हरिवंशपुराण 5.228-229

(2) सानत्‍कुमार और माहेन्द्र कल्पों का प्रथम पटल और इन्द्रक विमान । हरिवंशपुराण 6.48 दे9 सानत्कुमार

(3) रुचकवर पर्वत का सातवाँ कूट । यहाँ आनन्दा देवी रहती है । हरिवंशपुराण 5.703 देखें रुचकवर

(4) प्रथम नरकभूमि रत्‍नप्रभा के खरभाग का दसवाँ पटल । हरिवंशपुराण 4.52-54 देखें खरभाग

(5) एक जनपद । तीर्थंकर नेमिनाथ विहार करते हुए यहाँ आये थे । हरिवंशपुराण 59.109-111

(6) सुमेरु पर्वत के पाण्डुक वन का एक भवन । इसकी चौड़ाई और परिधि पैंतालीस योजन है । हरिवंशपुराण 5.316, 319-322

(7) मध्यलोक के सोलहवें द्वीप और सागर के आगे असंख्यात द्वीपों और सागरों में पाँचवाँ द्वीप एवं सागर । हरिवंशपुराण 5.622-626

(8) आँखों का सौन्दर्य-प्रसाधन । महापुराण 14.9


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अंजन&oldid=22433"
Categories:
  • अ
  • पुराण-कोष
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 5 May 2020, at 13:41.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki