पंचास्तिकाय संग्रह-सूत्र - गाथा 102: Difference between revisions
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<p>एवं पवयणसारं पंचत्थियसंगहं वियाणित्ता । (102)</p> | <p>एवं पवयणसारं पंचत्थियसंगहं वियाणित्ता । (102)</p> | ||
<p>जो मुयदि रागदोसे सो गाहदि दुक्खपरिमोक्खं ॥110॥</p> | <p>जो मुयदि रागदोसे सो गाहदि दुक्खपरिमोक्खं ॥110॥</p> | ||
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Latest revision as of 10:55, 21 August 2021
एवं पवयणसारं पंचत्थियसंगहं वियाणित्ता । (102)
जो मुयदि रागदोसे सो गाहदि दुक्खपरिमोक्खं ॥110॥