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कापोत: Difference between revisions

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Revision as of 09:36, 28 August 2022 (view source)
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Latest revision as of 14:27, 18 February 2023 (view source)
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<span class="HindiText"> अशुभलेश्या–देखें [[ लेश्या ]]।
<span class="GRef"> पंचसंग्रह / प्राकृत/1/147-148  </span><span class="PrakritGatha">रूसइ णिदंइ अण्णे दूसणबहलोय सोय-भय-बहलो। असुवइ परिभवइपरं पसंसइ य अप्पयं बहुसो।147।  ण य पत्तियइ परं सो अप्पाणं पिव परं पि मण्णंतो।तूसइ अइथुव्वंतो ण य जाणइ  ट्ठणि-बड्ढीओ।148। मरणं पत्थेइ रणे देइ सु बहुयं पिथुव्वमाणो हु। ण गणइ  कज्जाकज्जं लक्खणमेयं तु काउस्स।149। </span>= <span class="HindiText">जो दूसरें के ऊपर रोष करता हो,  दूसरों की निंदा करता हो, दूषण बहुल हो,  शोक बहुल हो, भय बहुल हो, दूसरों से ईर्ष्या करता हो, पर का पराभव करता हो,  नाना प्रकार से अपनी प्रशंसा करता हो, पर का विश्वास  न करता हो, अपने समान दूसरे   को मानता हो, स्तुति किये जाने पर अति संतुष्ट हो,  अपनी हानि और वृद्धि को न जानता हो, रण में  मरण का इच्छुक हो, स्तुति या प्रशंसा किये जाने पर बहुत  धनादिक देवे और कर्तव्य-अकर्तव्य को कुछ भी न गिनता हो, ये  सब '''कापोत''' लेश्या के चिह्न हैं। </span>
 
 
<span class="HindiText"> अशुभ लेश्या–देखें [[ लेश्या ]]। </span>


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Latest revision as of 14:27, 18 February 2023

पंचसंग्रह / प्राकृत/1/147-148 रूसइ णिदंइ अण्णे दूसणबहलोय सोय-भय-बहलो। असुवइ परिभवइपरं पसंसइ य अप्पयं बहुसो।147। ण य पत्तियइ परं सो अप्पाणं पिव परं पि मण्णंतो।तूसइ अइथुव्वंतो ण य जाणइ ट्ठणि-बड्ढीओ।148। मरणं पत्थेइ रणे देइ सु बहुयं पिथुव्वमाणो हु। ण गणइ कज्जाकज्जं लक्खणमेयं तु काउस्स।149। = जो दूसरें के ऊपर रोष करता हो, दूसरों की निंदा करता हो, दूषण बहुल हो, शोक बहुल हो, भय बहुल हो, दूसरों से ईर्ष्या करता हो, पर का पराभव करता हो, नाना प्रकार से अपनी प्रशंसा करता हो, पर का विश्वास न करता हो, अपने समान दूसरे  को मानता हो, स्तुति किये जाने पर अति संतुष्ट हो, अपनी हानि और वृद्धि को न जानता हो, रण में मरण का इच्छुक हो, स्तुति या प्रशंसा किये जाने पर बहुत धनादिक देवे और कर्तव्य-अकर्तव्य को कुछ भी न गिनता हो, ये सब कापोत लेश्या के चिह्न हैं।


 अशुभ लेश्या–देखें लेश्या ।


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