• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अपराजिता: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 20:32, 15 November 2022 (view source)
Shilpa jain (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Revision as of 18:54, 22 November 2022 (view source)
Poonam Jain (talk | contribs)
No edit summary
Newer edit →
Line 1: Line 1:


== सिद्धांतकोष से ==
== सिद्धांतकोष से ==
  <p>1. भगवान् मुनिसुव्रतनाथकी शासिका यक्षिणी-देखें [[ तीर्थंकर#5.3 | तीर्थंकर - 5.3]]; 2. पूर्व विदेहस्थ महावत्सा देशकी मुख्य नगरी-देखें [[ लोक#5.2 | लोक - 5.2]]; 3. नंदीश्वर द्वीपके पश्चिममें स्थित एक वापी; देखें [[ लोक#5.11 | लोक - 5.11]]; 4. रुचकपर्वत निवासिनी दिक्कुमारी-देखें [[ लोक#5.13 | लोक - 5.13]]।</p>
  <p>1. भगवान् मुनिसुव्रतनाथ की शासिका यक्षिणी-देखें [[ तीर्थंकर#5.3 | तीर्थंकर - 5.3]]; 2. पूर्व विदेहस्थ महावत्सा देश की मुख्य नगरी-देखें [[ लोक#5.2 | लोक - 5.2]]; 3. नंदीश्वर द्वीप के पश्चिम में स्थित एक वापी; देखें [[ लोक#5.11 | लोक - 5.11]]; 4. रुचकपर्वत निवासिनी दिक्कुमारी-देखें [[ लोक#5.13 | लोक - 5.13]]।</p>
   
   


Line 17: Line 17:
== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p id="1">(1) बलभद्र पद्म की जननी । <span class="GRef"> पद्मपुराण 20.238-239 </span></p>
<div class="HindiText">  <p id="1">(1) बलभद्र पद्म की जननी । <span class="GRef"> पद्मपुराण 20.238-239 </span></p>
<p id="2">(2) तीर्थंकर मुनिसुव्रत का दीक्षा-शिविका । <span class="GRef"> महापुराण 67.40,  </span><span class="GRef"> पद्मपुराण 21.36 </span></p>
<p id="2">(2) तीर्थंकर मुनिसुव्रत की दीक्षा-शिविका । <span class="GRef"> महापुराण 67.40,  </span><span class="GRef"> पद्मपुराण 21.36 </span></p>
<p id="3">(3) दर्भस्थल नगर के राजा सुकौशल और उसकी रानी अमृतप्रभावा की पुत्री, दशरथ की पत्नी, राम की जननी । अंत में यह मरकर आनत स्वर्ग मे देव हुई थी । <span class="GRef"> पद्मपुराण 22.170-172, 25.19-22, 123. 80-81 </span></p>
<p id="3">(3) दर्भस्थल नगर के राजा सुकौशल और उसकी रानी अमृतप्रभावा की पुत्री, दशरथ की पत्नी, राम की जननी । अंत में यह मरकर आनत स्वर्ग मे देव हुई थी । <span class="GRef"> पद्मपुराण 22.170-172, 25.19-22, 123. 80-81 </span></p>
<p id="4">(4) उज्जयिनी के राजा विजय की भार्या । सयुक्त 71.443</p>
<p id="4">(4) उज्जयिनी के राजा विजय की भार्या । सयुक्त 71.443</p>
Line 23: Line 23:
<p id="6">(6) वाराणसी के राजा अग्निशिख की रानी, बलभद्र नंदिमित्र की जननी । <span class="GRef"> महापुराण 66.102-107 </span></p>
<p id="6">(6) वाराणसी के राजा अग्निशिख की रानी, बलभद्र नंदिमित्र की जननी । <span class="GRef"> महापुराण 66.102-107 </span></p>
<p id="7">(7) रुचकवर द्वीप में स्थित इसी नाम के पर्वत पर पूर्व दिशा में वर्तमान अरिष्टकूटवासिनी देवी । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.699, 704-705 </span></p>
<p id="7">(7) रुचकवर द्वीप में स्थित इसी नाम के पर्वत पर पूर्व दिशा में वर्तमान अरिष्टकूटवासिनी देवी । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.699, 704-705 </span></p>
<p id="8">(8) रुचकवर पर्वत की वायव्य दिशा में स्थित रत्नोच्ययकूटवासिनी देवी । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.699,726 </span></p>
<p id="8">(8) रुचकवर पर्वत की वायव्य दिशा में स्थित रत्नोच्ययकूट वासिनी देवी । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.699,726 </span></p>
<p id="9">(9) समवसरण के सप्तपर्ण वन की वापिका । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 57.33 </span></p>
<p id="9">(9) समवसरण के सप्तपर्ण वन की वापिका । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 57.33 </span></p>
<p id="10">(10) नंदीश्वर द्वीप के दक्षिण में स्थित अंजनगिरि की एक वापी । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.660 </span></p>
<p id="10">(10) नंदीश्वर द्वीप के दक्षिण में स्थित अंजनगिरि की एक वापी । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.660 </span></p>

Revision as of 18:54, 22 November 2022



सिद्धांतकोष से

1. भगवान् मुनिसुव्रतनाथ की शासिका यक्षिणी-देखें तीर्थंकर - 5.3; 2. पूर्व विदेहस्थ महावत्सा देश की मुख्य नगरी-देखें लोक - 5.2; 3. नंदीश्वर द्वीप के पश्चिम में स्थित एक वापी; देखें लोक - 5.11; 4. रुचकपर्वत निवासिनी दिक्कुमारी-देखें लोक - 5.13।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) बलभद्र पद्म की जननी । पद्मपुराण 20.238-239

(2) तीर्थंकर मुनिसुव्रत की दीक्षा-शिविका । महापुराण 67.40, पद्मपुराण 21.36

(3) दर्भस्थल नगर के राजा सुकौशल और उसकी रानी अमृतप्रभावा की पुत्री, दशरथ की पत्नी, राम की जननी । अंत में यह मरकर आनत स्वर्ग मे देव हुई थी । पद्मपुराण 22.170-172, 25.19-22, 123. 80-81

(4) उज्जयिनी के राजा विजय की भार्या । सयुक्त 71.443

(5) महावत्सा देश की राजधानी । महापुराण 63.208-216, हरिवंशपुराण 5.247,236

(6) वाराणसी के राजा अग्निशिख की रानी, बलभद्र नंदिमित्र की जननी । महापुराण 66.102-107

(7) रुचकवर द्वीप में स्थित इसी नाम के पर्वत पर पूर्व दिशा में वर्तमान अरिष्टकूटवासिनी देवी । हरिवंशपुराण 5.699, 704-705

(8) रुचकवर पर्वत की वायव्य दिशा में स्थित रत्नोच्ययकूट वासिनी देवी । हरिवंशपुराण 5.699,726

(9) समवसरण के सप्तपर्ण वन की वापिका । हरिवंशपुराण 57.33

(10) नंदीश्वर द्वीप के दक्षिण में स्थित अंजनगिरि की एक वापी । हरिवंशपुराण 5.660


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अपराजिता&oldid=104378"
Categories:
  • अ
  • प्रथमानुयोग
  • करणानुयोग
  • पुराण-कोष
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 22 November 2022, at 18:54.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki