• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

हीलित: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 22:53, 10 October 2022 (view source)
SandeshHerwade (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Revision as of 10:02, 30 November 2022 (view source)
J2jinendra (talk | contribs)
No edit summary
Newer edit →
Line 1: Line 1:
कायोत्सर्ग का एक अतिचार - देखें [[ व्युत्सर्ग#1.11 | व्युत्सर्ग - 1.11]]।
 <span class="GRef">मूलाचार/603-607</span> <span class="PrakritGatha">अणादिट्ठं च  थद्धं च पविट्ठं परिपीडिदं। दोलाइयमंकुसियं तहा कच्छभरिंगियं।603। मच्छुव्वत्तं  मणोदुट्ठं वेदिआबद्धमेव य। भयदोसो वभयत्तं इड्ढिगारव गारवं।604। तेणिदं पडिणिदं  चावि पदुट्ठं तज्जिदं तधा। सद्दं च हीलिदं चावि तह तिवलिदकंचिदं।605। दिट्ठमदिट्ठं  चावि य संगस्स करमोयणं। आलद्धमणालद्धं च हीणमुत्तरचूलियं।606। मूगं च दद्दुरं  चावि चुलुलिदमपच्छिमं। बत्तीसदोसविसुद्धं किदियम्मं पउचदे।607। </span>= <span class="HindiText">अनादृत, स्तब्ध,  प्रविष्ट, परिपीडित, दोलायित,  अंकुशित, कच्छपरिंगित, मत्स्योद्वर्त, मनोदुष्ट, वेदिकाबद्ध, भय, विभ्य,  ऋद्धिगौरव, अन्य गौरव, स्तेनित,  प्रतिनीत, प्रदुष्ट, तर्जित,  शब्द, <strong>हीलित</strong>, त्रिवलित, कुंचित,  दृष्ट, अदृष्ट, संघकरमोचन आलब्ध, अनालब्ध, हीन, उत्तरचूलिका, मूक, दर्दुर, चलुलित,  इन बत्तीस दोषों से रहित विशुद्ध कृतिकर्म जो साधु करता है, उसके बहुत निर्जरा होती है।603-607। (<span class="GRef"> चारित्रसार/155/3 </span>)। </span><br />
<span class="GRef"> अनगारधर्मामृत/8/98-111/822  </span><span class="SanskritGatha"> ....शब्दो जल्पक्रियान्येषामुपहासादि हेलितम्। त्रिवलितं कटिग्रीवाहृद्भंगो  भृकुटिर्नवा।106। ....द्वात्रिंशो वंदने गीत्या दोषः सुललिताह्वयः। इति दोषोज्झिता  कार्या वंदना निर्जरार्थिना।111। </span>
<span class="HindiText"> वंदना के समय दूसरों को धक्का आदि देना या उनकी हँसी आदि करना <strong>हेलित</strong>,यह वंदना के 32 दोषों में से एक दोष है।</span>
 
 
<span class="HindiText">कायोत्सर्ग और उसके अतिचारों को विस्तार से जानने के लिये देखें [[ व्युत्सर्ग]]।</span>


<noinclude>
<noinclude>

Revision as of 10:02, 30 November 2022

 मूलाचार/603-607 अणादिट्ठं च थद्धं च पविट्ठं परिपीडिदं। दोलाइयमंकुसियं तहा कच्छभरिंगियं।603। मच्छुव्वत्तं मणोदुट्ठं वेदिआबद्धमेव य। भयदोसो वभयत्तं इड्ढिगारव गारवं।604। तेणिदं पडिणिदं चावि पदुट्ठं तज्जिदं तधा। सद्दं च हीलिदं चावि तह तिवलिदकंचिदं।605। दिट्ठमदिट्ठं चावि य संगस्स करमोयणं। आलद्धमणालद्धं च हीणमुत्तरचूलियं।606। मूगं च दद्दुरं चावि चुलुलिदमपच्छिमं। बत्तीसदोसविसुद्धं किदियम्मं पउचदे।607। = अनादृत, स्तब्ध, प्रविष्ट, परिपीडित, दोलायित, अंकुशित, कच्छपरिंगित, मत्स्योद्वर्त, मनोदुष्ट, वेदिकाबद्ध, भय, विभ्य, ऋद्धिगौरव, अन्य गौरव, स्तेनित, प्रतिनीत, प्रदुष्ट, तर्जित, शब्द, हीलित, त्रिवलित, कुंचित, दृष्ट, अदृष्ट, संघकरमोचन आलब्ध, अनालब्ध, हीन, उत्तरचूलिका, मूक, दर्दुर, चलुलित, इन बत्तीस दोषों से रहित विशुद्ध कृतिकर्म जो साधु करता है, उसके बहुत निर्जरा होती है।603-607। ( चारित्रसार/155/3 )।
अनगारधर्मामृत/8/98-111/822 ....शब्दो जल्पक्रियान्येषामुपहासादि हेलितम्। त्रिवलितं कटिग्रीवाहृद्भंगो भृकुटिर्नवा।106। ....द्वात्रिंशो वंदने गीत्या दोषः सुललिताह्वयः। इति दोषोज्झिता कार्या वंदना निर्जरार्थिना।111। वंदना के समय दूसरों को धक्का आदि देना या उनकी हँसी आदि करना हेलित,यह वंदना के 32 दोषों में से एक दोष है।


कायोत्सर्ग और उसके अतिचारों को विस्तार से जानने के लिये देखें व्युत्सर्ग।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=हीलित&oldid=104784"
Categories:
  • ह
  • चरणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 30 November 2022, at 10:02.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki