• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

पिंगल: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 20:46, 31 October 2022 (view source)
Bhumi Doshi (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Revision as of 22:21, 17 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
Newer edit →
Line 14: Line 14:
<div class="HindiText">  <p id="1">(1) चक्रवर्ती की नौ निधियों में दिव्याभरण उत्पन्न करने वाली एक निधि । <span class="GRef"> महापुराण 37.80,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 11.122 </span></p>
<div class="HindiText">  <p id="1">(1) चक्रवर्ती की नौ निधियों में दिव्याभरण उत्पन्न करने वाली एक निधि । <span class="GRef"> महापुराण 37.80,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 11.122 </span></p>
<p id="2">(2) वसुदेव तथा उसकी रानी प्रभावती का पुत्र । <span class="GRef"> <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 48.63 </span>  </span></p>
<p id="2">(2) वसुदेव तथा उसकी रानी प्रभावती का पुत्र । <span class="GRef"> <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 48.63 </span>  </span></p>
<p id="3">(3) एक नृप । <span class="GRef"> पद्मपुराण 96.29-50 </span></p>
<p id="3">(3) एक नृप । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:पद्मपुराण_-_पर्व_96#29|पद्मपुराण - 96.29-50]] </span></p>
<p id="4">(4) चक्रपुर नगर के राजा चक्रध्वज के पुरोहित धूमकेश का पुत्र । अंत में विरक्त हो इसने दिगंबर दीक्षा धारण की थी । मरकर यह महाकाल नामक असुर हुआ । इसने पूर्व विरोधवश भामंडल को मारने के लिए उसके उत्पन्न होने की प्रतीक्षा की थी किंतु भामंडल के उत्पन्न होते ही इसके विचार बदल गये थे अत यह भामंडल को कुंडल पहनाकर तथा उसे पर्णलध्वी विद्या देकर सुखकर स्थान में छोड़ गया था । <span class="GRef"> पद्मपुराण 26. 4-44, 113-119 </span></p>
<p id="4">(4) चक्रपुर नगर के राजा चक्रध्वज के पुरोहित धूमकेश का पुत्र । अंत में विरक्त हो इसने दिगंबर दीक्षा धारण की थी । मरकर यह महाकाल नामक असुर हुआ । इसने पूर्व विरोधवश भामंडल को मारने के लिए उसके उत्पन्न होने की प्रतीक्षा की थी किंतु भामंडल के उत्पन्न होते ही इसके विचार बदल गये थे अत यह भामंडल को कुंडल पहनाकर तथा उसे पर्णलध्वी विद्या देकर सुखकर स्थान में छोड़ गया था । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:पद्मपुराण_-_पर्व_26#4|पद्मपुराण - 26.4-4]]4, 113-119 </span></p>
<p id="5">(5) एक नगर रक्षक । यह पुंडरीकिणी नगरी के राजा सुरदेव का जीव था । <span class="GRef"> महापुराण 46.356  </span></p>
<p id="5">(5) एक नगर रक्षक । यह पुंडरीकिणी नगरी के राजा सुरदेव का जीव था । <span class="GRef"> महापुराण 46.356  </span></p>
<p id="6">(6) वसुदेव का पुत्र । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 48.63 </span></p>
<p id="6">(6) वसुदेव का पुत्र । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 48.63 </span></p>

Revision as of 22:21, 17 November 2023



सिद्धांतकोष से

चक्रवर्ती की नव निधियों में से एक - देखें शलाका पुरुष - 2।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

पुराणकोष से

(1) चक्रवर्ती की नौ निधियों में दिव्याभरण उत्पन्न करने वाली एक निधि । महापुराण 37.80, हरिवंशपुराण 11.122

(2) वसुदेव तथा उसकी रानी प्रभावती का पुत्र । हरिवंशपुराण 48.63

(3) एक नृप । पद्मपुराण - 96.29-50

(4) चक्रपुर नगर के राजा चक्रध्वज के पुरोहित धूमकेश का पुत्र । अंत में विरक्त हो इसने दिगंबर दीक्षा धारण की थी । मरकर यह महाकाल नामक असुर हुआ । इसने पूर्व विरोधवश भामंडल को मारने के लिए उसके उत्पन्न होने की प्रतीक्षा की थी किंतु भामंडल के उत्पन्न होते ही इसके विचार बदल गये थे अत यह भामंडल को कुंडल पहनाकर तथा उसे पर्णलध्वी विद्या देकर सुखकर स्थान में छोड़ गया था । पद्मपुराण - 26.4-44, 113-119

(5) एक नगर रक्षक । यह पुंडरीकिणी नगरी के राजा सुरदेव का जीव था । महापुराण 46.356

(6) वसुदेव का पुत्र । हरिवंशपुराण 48.63


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=पिंगल&oldid=120956"
Categories:
  • प
  • प्रथमानुयोग
  • पुराण-कोष
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 17 November 2023, at 22:21.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki