• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

उज्जयिनी: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 22:16, 17 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Latest revision as of 14:40, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
Line 1: Line 1:
<div class="HindiText">  <p> शिप्रा के तट पर स्थित मालव जनपद के अंतर्गत एक नगरी । <span class="GRef"> महापुराण 16.153, 29.47, 63  </span>राजा श्रीधर्मा के बलि, बृहस्पति आदि मंत्रियों का मृतसागर मुनि से यही विवाद हुआ था और वे देवों दारा यहीं कीले गये थे तथा इस नगर से उन्हें निकाल भी दिया गया था । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 20.3-11  </span>भोगों और शरीर से उदासीन लोगों का यहाँ निवास था । अपरनाम अवंति । लक्ष्मण को पति रूप में पाने का जिन कन्याओं को सौभाग्य प्राप्त हुआ था उनमें इस नगर की भी एक कन्या थी । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:पद्मपुराण_-_पर्व_33#138|पद्मपुराण - 33.138]],145, 80.113,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 60.105 </span></p>
<div class="HindiText">  <p class="HindiText"> शिप्रा के तट पर स्थित मालव जनपद के अंतर्गत एक नगरी । <span class="GRef"> महापुराण 16.153, 29.47, 63  </span>राजा श्रीधर्मा के बलि, बृहस्पति आदि मंत्रियों का मृतसागर मुनि से यही विवाद हुआ था और वे देवों दारा यहीं कीले गये थे तथा इस नगर से उन्हें निकाल भी दिया गया था । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_20#3|हरिवंशपुराण - 20.3-11]] </span>भोगों और शरीर से उदासीन लोगों का यहाँ निवास था । अपरनाम अवंति । लक्ष्मण को पति रूप में पाने का जिन कन्याओं को सौभाग्य प्राप्त हुआ था उनमें इस नगर की भी एक कन्या थी । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:पद्मपुराण_-_पर्व_33#138|पद्मपुराण - 33.138]],145, 80.113,  </span><span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_60#105|हरिवंशपुराण - 60.105]] </span></p>
   </div>
   </div>



Latest revision as of 14:40, 27 November 2023



शिप्रा के तट पर स्थित मालव जनपद के अंतर्गत एक नगरी । महापुराण 16.153, 29.47, 63 राजा श्रीधर्मा के बलि, बृहस्पति आदि मंत्रियों का मृतसागर मुनि से यही विवाद हुआ था और वे देवों दारा यहीं कीले गये थे तथा इस नगर से उन्हें निकाल भी दिया गया था । हरिवंशपुराण - 20.3-11 भोगों और शरीर से उदासीन लोगों का यहाँ निवास था । अपरनाम अवंति । लक्ष्मण को पति रूप में पाने का जिन कन्याओं को सौभाग्य प्राप्त हुआ था उनमें इस नगर की भी एक कन्या थी । पद्मपुराण - 33.138,145, 80.113, हरिवंशपुराण - 60.105


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=उज्जयिनी&oldid=124071"
Categories:
  • पुराण-कोष
  • उ
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 14:40.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki