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ग्रह: Difference between revisions

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<p class="HindiText"><ol>
== सिद्धांतकोष से ==
   <li><strong>अठासी ग्रहों का नाम निर्देश</strong><BR>        ति.प./७/१५-२२ का भाषार्थ—१.  बुध; २. शुक्र; ३. वृहस्‍पति; ४. मंगल; ५. शनि; ६. काल; ७. लोहित; ८.कनक; ९. नील; १०.  विकाल; ११. केश (कोश); १२. कवयव (कचयव); १३. कनक-संस्‍थान; १४. दुन्‍दुभक (दुन्‍दुभि);  १५. रक्तनिभ; १६.नीलाभास; १७. अशोक संस्‍थान; १८. कंस; १९. रूपनिभ (रूपनिर्भास); २०.  कंसकवर्ण (कंसवर्ण); २१. शंखपरिणाम; २२. तिलपुच्‍छ: २३. शंखवर्ण; २४. उदकवर्ण (उदय);  २५. पंचवर्ण; २६. उत्‍पात; २७. धूमकेतु; २८. तिल; २९. नभ; ३०. क्षारराशि; ३१. विजिष्‍णु (विजयिष्‍णु); ३२. सदृश; ३३. संधि (शान्ति); ३४. कलेवर; ३५. अभिन्न (अभिन्न सन्धि);  ३६. ग्रन्थि; ३७. मानवक (मान); ३८. कालक; ३९. कालकेतु; ४०. निलय; ४१. अनय; ४२. विद्युज्जिहृ;  ४३. सिंह; ४४. अलक; ४५. निर्दु:ख; ४६. काल; ४७. महाकाल; ४८. रुद्र; ४९. महारुद्र; ५०.  सन्‍तान; ५१. विपुल; ५२. संभव; ५३. स्‍वार्थी; ५४. क्षेम (क्षेमंकर); ५५. चन्‍द्र;  ५६. निर्मन्‍त्र; ५७. ज्‍यातिष्‍माण; ५८. दिशसंस्थित (दिशा); ५९. विरत (विरज); ६०.  वीतशोक; ६१. निश्‍चल; ६२. प्रलम्‍ब; ६३. भासुर; ६४. स्‍वयंप्रभ; ६५. विजय; ६६. वैजयन्‍त;  ६७. सीमंकर; ६८. अपराजित; ६९. जयन्‍त; ७०. विमल; ७१. अभयंकर; ७२. विकस; ७३. काष्‍ठी (करिकाष्‍ठ); ७४. विकट; ७५. कज्‍जलो; ७६. अग्निज्‍वाल; ७७. अशोक; ७८. केतु; ७९. क्षीररस;  ८०. अघ; ८१. श्रवण; ८२. जलकेतु; ८३. केतु (राहु); ८४. अंतरद; ८५. एकसंस्‍थान; ८६. अश्‍व;  ८७. भावग्रह; ८८. महाग्रह, इस प्रकार ये ८८ ग्रहों के नाम हैं।<BR><strong>नोट</strong>—ब्रैकेट में दिए गए नाम  त्रिलोक सार की अपेक्षा है। नं.१७; २६; ३८; ३९; ४४; ५१; ५५; ७५; ७७ ये नौ नाम त्रि.सा.  में नहीं हैं। इनके स्‍थान पर अन्‍य नौ नाम दिये हैं–अश्‍वस्‍थान; धूम; अक्ष;  चतुपाद; वस्‍तून; त्रस्‍त; एकजटी; श्रवण; (त्रि.सा./३६३-३७०) </li>
<ol>
   <li><strong>अठासी ग्रहों का नाम निर्देश</strong><BR>        ति.प./7/15-22 का भाषार्थ—1.  बुध; 2. शुक्र; 3. वृहस्पति; 4. मंगल; 5. शनि; 6. काल; 7. लोहित; 8.कनक; 9. नील; 10.  विकाल; 11. केश (कोश); 12. कवयव (कचयव); 13. कनक-संस्थान; 14. दुन्दुभक (दुन्दुभि);  15. रक्तनिभ; 16.नीलाभास; 17. अशोक संस्थान; 18. कंस; 19. रूपनिभ (रूपनिर्भास); 20.  कंसकवर्ण (कंसवर्ण); 21. शंखपरिणाम; 22. तिलपुच्छ: 23. शंखवर्ण; 24. उदकवर्ण (उदय);  25. पंचवर्ण; 26. उत्पात; 27. धूमकेतु; 28. तिल; 29. नभ; 30. क्षारराशि; 31. विजिष्णु (विजयिष्णु); 32. सदृश; 33. संधि (शान्ति); 34. कलेवर; 35. अभिन्न (अभिन्न सन्धि);  36. ग्रन्थि; 37. मानवक (मान); 38. कालक; 39. कालकेतु; 40. निलय; 41. अनय; 42. विद्युज्जिहृ;  43. सिंह; 44. अलक; 45. निर्दु:ख; 46. काल; 47. महाकाल; 48. रुद्र; 49. महारुद्र; 50.  सन्तान; 51. विपुल; 52. संभव; 53. स्वार्थी; 54. क्षेम (क्षेमंकर); 55. चन्द्र;  56. निर्मन्त्र; 57. ज्यातिष्माण; 58. दिशसंस्थित (दिशा); 59. विरत (विरज); 60.  वीतशोक; 61. निश्चल; 62. प्रलम्ब; 63. भासुर; 64. स्वयंप्रभ; 65. विजय; 66. वैजयन्त;  67. सीमंकर; 68. अपराजित; 69. जयन्त; 70. विमल; 71. अभयंकर; 72. विकस; 73. काष्ठी (करिकाष्ठ); 74. विकट; 75. कज्जलो; 76. अग्निज्वाल; 77. अशोक; 78. केतु; 79. क्षीररस;  80. अघ; 81. श्रवण; 82. जलकेतु; 83. केतु (राहु); 84. अंतरद; 85. एकसंस्थान; 86. अश्व;  87. भावग्रह; 88. महाग्रह, इस प्रकार ये 88 ग्रहों के नाम हैं।<BR><strong>नोट</strong>—ब्रैकेट में दिए गए नाम  त्रिलोक सार की अपेक्षा है। नं.17; 26; 38; 39; 44; 51; 55; 75; 77 ये नौ नाम त्रि.सा.  में नहीं हैं। इनके स्थान पर अन्य नौ नाम दिये हैं–अश्वस्थान; धूम; अक्ष;  चतुपाद; वस्तून; त्रस्त; एकजटी; श्रवण; (त्रि.सा./363-370) </li>
</ol>
</ol>
<ul>
<ul>
   <li><strong> ग्रहों की संख्‍या व  उनका लोक में अवस्‍थान—</strong>( देखें - [[ ज्‍यो‍तिष देव#2 | ज्‍यो‍तिष देव / २ ]])। </li>
   <li><strong> ग्रहों की संख्या व  उनका लोक में अवस्थान—</strong>(देखें [[ ज्योतिष देव#2 | ज्योतिष देव - 2]])। </li>
</ul>
</ul>
<p><strong>&nbsp;</strong></p></p>
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== पुराणकोष से ==
<p> ज्योतिष्क देव । <span class="GRef"> महापुराण 3.84 </span></p>
 
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[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: ग]]

Revision as of 21:40, 5 July 2020

== सिद्धांतकोष से ==

  1. अठासी ग्रहों का नाम निर्देश
    ति.प./7/15-22 का भाषार्थ—1. बुध; 2. शुक्र; 3. वृहस्पति; 4. मंगल; 5. शनि; 6. काल; 7. लोहित; 8.कनक; 9. नील; 10. विकाल; 11. केश (कोश); 12. कवयव (कचयव); 13. कनक-संस्थान; 14. दुन्दुभक (दुन्दुभि); 15. रक्तनिभ; 16.नीलाभास; 17. अशोक संस्थान; 18. कंस; 19. रूपनिभ (रूपनिर्भास); 20. कंसकवर्ण (कंसवर्ण); 21. शंखपरिणाम; 22. तिलपुच्छ: 23. शंखवर्ण; 24. उदकवर्ण (उदय); 25. पंचवर्ण; 26. उत्पात; 27. धूमकेतु; 28. तिल; 29. नभ; 30. क्षारराशि; 31. विजिष्णु (विजयिष्णु); 32. सदृश; 33. संधि (शान्ति); 34. कलेवर; 35. अभिन्न (अभिन्न सन्धि); 36. ग्रन्थि; 37. मानवक (मान); 38. कालक; 39. कालकेतु; 40. निलय; 41. अनय; 42. विद्युज्जिहृ; 43. सिंह; 44. अलक; 45. निर्दु:ख; 46. काल; 47. महाकाल; 48. रुद्र; 49. महारुद्र; 50. सन्तान; 51. विपुल; 52. संभव; 53. स्वार्थी; 54. क्षेम (क्षेमंकर); 55. चन्द्र; 56. निर्मन्त्र; 57. ज्यातिष्माण; 58. दिशसंस्थित (दिशा); 59. विरत (विरज); 60. वीतशोक; 61. निश्चल; 62. प्रलम्ब; 63. भासुर; 64. स्वयंप्रभ; 65. विजय; 66. वैजयन्त; 67. सीमंकर; 68. अपराजित; 69. जयन्त; 70. विमल; 71. अभयंकर; 72. विकस; 73. काष्ठी (करिकाष्ठ); 74. विकट; 75. कज्जलो; 76. अग्निज्वाल; 77. अशोक; 78. केतु; 79. क्षीररस; 80. अघ; 81. श्रवण; 82. जलकेतु; 83. केतु (राहु); 84. अंतरद; 85. एकसंस्थान; 86. अश्व; 87. भावग्रह; 88. महाग्रह, इस प्रकार ये 88 ग्रहों के नाम हैं।
    नोट—ब्रैकेट में दिए गए नाम त्रिलोक सार की अपेक्षा है। नं.17; 26; 38; 39; 44; 51; 55; 75; 77 ये नौ नाम त्रि.सा. में नहीं हैं। इनके स्थान पर अन्य नौ नाम दिये हैं–अश्वस्थान; धूम; अक्ष; चतुपाद; वस्तून; त्रस्त; एकजटी; श्रवण; (त्रि.सा./363-370)
  • ग्रहों की संख्या व उनका लोक में अवस्थान—(देखें ज्योतिष देव - 2)।

 


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