• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

चिंत: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 17:08, 12 May 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
Revision as of 21:41, 5 July 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
Newer edit →
Line 1: Line 1:
 <p> चक्रवर्ती अरनाथ और मल्‍लि‍नाथ के बीच हुए नवें चक्रवर्ती महापद्‌म के पूर्वभव का जीव । सुप्रभ मुनि का शिष्य होकर यह ब्रह्म स्वर्ग में उत्पन्न हुआ । वहाँ से च्‍युत होकर यह हस्तिनापुर नगर मे राजा पद्‌मरथ और रानी मयूरी का महापद्‌म नामक पुत्र हुआ । यह नवा चक्रवर्ती था । इस पर्याय में इसकी आठ पुत्रियाँ हुई थी जिन्हें आठ विद्याधर हरकर ले गये थे । यह उन्हें यद्यपि वापिस ले आया था परन्तु विरक्त होकर इन आठों ने दीक्षा धारण कर ली । वे विद्याधर भी दीक्षित हो गये थे । इस घटना से प्रतिबोध पाकर इसने अपने पुत्र पद्‌म को राज्य सौंप दिया और विष्णु नामक इसके पुत्र के साथ दीक्षा धारण कर ली । अन्त में केवलज्ञान प्राप्त करके यह संसार से मुक्त हो गया । पद्मपुराण 20. 178-184</p>
 <p> चक्रवर्ती अरनाथ और मल्लिनाथ के बीच हुए नवें चक्रवर्ती महापद्म के पूर्वभव का जीव । सुप्रभ मुनि का शिष्य होकर यह ब्रह्म स्वर्ग में उत्पन्न हुआ । वहाँ से च्युत होकर यह हस्तिनापुर नगर मे राजा पद्मरथ और रानी मयूरी का महापद्म नामक पुत्र हुआ । यह नवा चक्रवर्ती था । इस पर्याय में इसकी आठ पुत्रियाँ हुई थी जिन्हें आठ विद्याधर हरकर ले गये थे । यह उन्हें यद्यपि वापिस ले आया था परन्तु विरक्त होकर इन आठों ने दीक्षा धारण कर ली । वे विद्याधर भी दीक्षित हो गये थे । इस घटना से प्रतिबोध पाकर इसने अपने पुत्र पद्म को राज्य सौंप दिया और विष्णु नामक इसके पुत्र के साथ दीक्षा धारण कर ली । अन्त में केवलज्ञान प्राप्त करके यह संसार से मुक्त हो गया । <span class="GRef"> पद्मपुराण 20. 178-184 </span></p>
   
   


<noinclude>
<noinclude>
[[ चित्रोपकरण | पूर्व पृष्ठ ]]
[[ चिद्विलासa | पूर्व पृष्ठ ]]


[[ चिन्‍तागति | अगला पृष्ठ ]]
[[ चिन्तागति | अगला पृष्ठ ]]


</noinclude>
</noinclude>
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: च]]
[[Category: च]]

Revision as of 21:41, 5 July 2020



चक्रवर्ती अरनाथ और मल्लिनाथ के बीच हुए नवें चक्रवर्ती महापद्म के पूर्वभव का जीव । सुप्रभ मुनि का शिष्य होकर यह ब्रह्म स्वर्ग में उत्पन्न हुआ । वहाँ से च्युत होकर यह हस्तिनापुर नगर मे राजा पद्मरथ और रानी मयूरी का महापद्म नामक पुत्र हुआ । यह नवा चक्रवर्ती था । इस पर्याय में इसकी आठ पुत्रियाँ हुई थी जिन्हें आठ विद्याधर हरकर ले गये थे । यह उन्हें यद्यपि वापिस ले आया था परन्तु विरक्त होकर इन आठों ने दीक्षा धारण कर ली । वे विद्याधर भी दीक्षित हो गये थे । इस घटना से प्रतिबोध पाकर इसने अपने पुत्र पद्म को राज्य सौंप दिया और विष्णु नामक इसके पुत्र के साथ दीक्षा धारण कर ली । अन्त में केवलज्ञान प्राप्त करके यह संसार से मुक्त हो गया । पद्मपुराण 20. 178-184


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=चिंत&oldid=37142"
Categories:
  • पुराण-कोष
  • च
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 5 July 2020, at 21:41.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki