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शरण: Difference between revisions

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Revision as of 21:15, 27 February 2016 (view source)
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रा.वा./९/७/२/६००/१५ <p class="SanskritText">शरणं द्विविधं-लौकिकं लोकोत्तरं चेति। तत्प्रत्येकं त्रिधा-जीवाजीवमिश्रकभेदात् । तत्र राजा देवता वा लौकिकं जीवशरणम्, प्राकारादि अजीवशरणम् । ग्रामनगरादि मिश्रकम् । पञ्च गुरवो लोकोत्तरजीवशरणम्, तत्प्रतिबिम्बाद्यजीवशरणम्, सधर्मोपकरणसाधुवर्णो मिश्रकशरणम् ।</p>
रा.वा./9/7/2/600/15 <p class="SanskritText">शरणं द्विविधं-लौकिकं लोकोत्तरं चेति। तत्प्रत्येकं त्रिधा-जीवाजीवमिश्रकभेदात् । तत्र राजा देवता वा लौकिकं जीवशरणम्, प्राकारादि अजीवशरणम् । ग्रामनगरादि मिश्रकम् । पञ्च गुरवो लोकोत्तरजीवशरणम्, तत्प्रतिबिम्बाद्यजीवशरणम्, सधर्मोपकरणसाधुवर्णो मिश्रकशरणम् ।</p>
<p class="HindiText">शरण दो प्रकार का है - एक लौकिक दूसरा लोकोत्तर। तथा वे दोनों ही जीव, अजीव और मिश्रक के भेद से तीन-तीन प्रकार के हैं। </p>
<p class="HindiText">शरण दो प्रकार का है - एक लौकिक दूसरा लोकोत्तर। तथा वे दोनों ही जीव, अजीव और मिश्रक के भेद से तीन-तीन प्रकार के हैं। </p>
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  <p>धर्म सहित साधुओं का समुदाय तथा उनके उपकरण आदि लोकोत्तर मिश्र शरण हैं। (चा.सा./१७८/४)</p>
  <p>धर्म सहित साधुओं का समुदाय तथा उनके उपकरण आदि लोकोत्तर मिश्र शरण हैं। (चा.सा./178/4)</p>
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[[Category:श]]
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[[Category: श]]

Revision as of 21:47, 5 July 2020

रा.वा./9/7/2/600/15

शरणं द्विविधं-लौकिकं लोकोत्तरं चेति। तत्प्रत्येकं त्रिधा-जीवाजीवमिश्रकभेदात् । तत्र राजा देवता वा लौकिकं जीवशरणम्, प्राकारादि अजीवशरणम् । ग्रामनगरादि मिश्रकम् । पञ्च गुरवो लोकोत्तरजीवशरणम्, तत्प्रतिबिम्बाद्यजीवशरणम्, सधर्मोपकरणसाधुवर्णो मिश्रकशरणम् ।

शरण दो प्रकार का है - एक लौकिक दूसरा लोकोत्तर। तथा वे दोनों ही जीव, अजीव और मिश्रक के भेद से तीन-तीन प्रकार के हैं।

  1. लौकिक
    • राजा देवता आदि लौकिक जीवशरण हैं।

    • कोट, शहर, पनाह आदि लौकिक अजीव शरण हैं।

    • और कोट खाई सहित गाँव नगर आदि लौकिक मिश्र शरण हैं।

  2. लोकोत्तर
    • पाँचों परमेष्ठी लोकोत्तर जीव शरण है।

    • इन अरहंत आदि के प्रतिबिंब आदि लोकोत्तर अजीव शरण हैं।

    • धर्म सहित साधुओं का समुदाय तथा उनके उपकरण आदि लोकोत्तर मिश्र शरण हैं। (चा.सा./178/4)


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