• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

ग्रह: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 22:40, 22 July 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Revision as of 16:22, 19 August 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
Newer edit →
Line 1: Line 1:
== सिद्धांतकोष से ==
== सिद्धांतकोष से ==
<ol>
<ol>
   <li><strong>अठासी ग्रहों का नाम निर्देश</strong><BR>        तिलोयपण्णत्ति/7/15-22  का भाषार्थ—1.  बुध; 2. शुक्र; 3. वृहस्पति; 4. मंगल; 5. शनि; 6. काल; 7. लोहित; 8.कनक; 9. नील; 10.  विकाल; 11. केश (कोश); 12. कवयव (कचयव); 13. कनक-संस्थान; 14. दुन्दुभक (दुन्दुभि);  15. रक्तनिभ; 16.नीलाभास; 17. अशोक संस्थान; 18. कंस; 19. रूपनिभ (रूपनिर्भास); 20.  कंसकवर्ण (कंसवर्ण); 21. शंखपरिणाम; 22. तिलपुच्छ: 23. शंखवर्ण; 24. उदकवर्ण (उदय);  25. पंचवर्ण; 26. उत्पात; 27. धूमकेतु; 28. तिल; 29. नभ; 30. क्षारराशि; 31. विजिष्णु  (विजयिष्णु); 32. सदृश; 33. संधि (शान्ति); 34. कलेवर; 35. अभिन्न (अभिन्न सन्धि);  36. ग्रन्थि; 37. मानवक (मान); 38. कालक; 39. कालकेतु; 40. निलय; 41. अनय; 42. विद्युज्जिहृ;  43. सिंह; 44. अलक; 45. निर्दु:ख; 46. काल; 47. महाकाल; 48. रुद्र; 49. महारुद्र; 50.  सन्तान; 51. विपुल; 52. संभव; 53. स्वार्थी; 54. क्षेम (क्षेमंकर); 55. चन्द्र;  56. निर्मन्त्र; 57. ज्यातिष्माण; 58. दिशसंस्थित (दिशा); 59. विरत (विरज); 60.  वीतशोक; 61. निश्चल; 62. प्रलम्ब; 63. भासुर; 64. स्वयंप्रभ; 65. विजय; 66. वैजयन्त;  67. सीमंकर; 68. अपराजित; 69. जयन्त; 70. विमल; 71. अभयंकर; 72. विकस; 73. काष्ठी  (करिकाष्ठ); 74. विकट; 75. कज्जलो; 76. अग्निज्वाल; 77. अशोक; 78. केतु; 79. क्षीररस;  80. अघ; 81. श्रवण; 82. जलकेतु; 83. केतु (राहु); 84. अंतरद; 85. एकसंस्थान; 86. अश्व;  87. भावग्रह; 88. महाग्रह, इस प्रकार ये 88 ग्रहों के नाम हैं।<BR><strong>नोट</strong>—ब्रैकेट में दिए गए नाम  त्रिलोक सार की अपेक्षा है। नं.17; 26; 38; 39; 44; 51; 55; 75; 77 ये नौ नाम  त्रिलोकसार    में नहीं हैं। इनके स्थान पर अन्य नौ नाम दिये हैं–अश्वस्थान; धूम; अक्ष;  चतुपाद; वस्तून; त्रस्त; एकजटी; श्रवण; ( त्रिलोकसार/363-370 ) </li>
   <li><strong>अठासी ग्रहों का नाम निर्देश</strong><BR>        तिलोयपण्णत्ति/7/15-22  का भाषार्थ—1.  बुध; 2. शुक्र; 3. वृहस्पति; 4. मंगल; 5. शनि; 6. काल; 7. लोहित; 8.कनक; 9. नील; 10.  विकाल; 11. केश (कोश); 12. कवयव (कचयव); 13. कनक-संस्थान; 14. दुंदुभक (दुंदुभि);  15. रक्तनिभ; 16.नीलाभास; 17. अशोक संस्थान; 18. कंस; 19. रूपनिभ (रूपनिर्भास); 20.  कंसकवर्ण (कंसवर्ण); 21. शंखपरिणाम; 22. तिलपुच्छ: 23. शंखवर्ण; 24. उदकवर्ण (उदय);  25. पंचवर्ण; 26. उत्पात; 27. धूमकेतु; 28. तिल; 29. नभ; 30. क्षारराशि; 31. विजिष्णु  (विजयिष्णु); 32. सदृश; 33. संधि (शांति); 34. कलेवर; 35. अभिन्न (अभिन्न संधि);  36. ग्रंथि; 37. मानवक (मान); 38. कालक; 39. कालकेतु; 40. निलय; 41. अनय; 42. विद्युज्जिहृ;  43. सिंह; 44. अलक; 45. निर्दु:ख; 46. काल; 47. महाकाल; 48. रुद्र; 49. महारुद्र; 50.  संतान; 51. विपुल; 52. संभव; 53. स्वार्थी; 54. क्षेम (क्षेमंकर); 55. चंद्र;  56. निर्मंत्र; 57. ज्यातिष्माण; 58. दिशसंस्थित (दिशा); 59. विरत (विरज); 60.  वीतशोक; 61. निश्चल; 62. प्रलंब; 63. भासुर; 64. स्वयंप्रभ; 65. विजय; 66. वैजयंत;  67. सीमंकर; 68. अपराजित; 69. जयंत; 70. विमल; 71. अभयंकर; 72. विकस; 73. काष्ठी  (करिकाष्ठ); 74. विकट; 75. कज्जलो; 76. अग्निज्वाल; 77. अशोक; 78. केतु; 79. क्षीररस;  80. अघ; 81. श्रवण; 82. जलकेतु; 83. केतु (राहु); 84. अंतरद; 85. एकसंस्थान; 86. अश्व;  87. भावग्रह; 88. महाग्रह, इस प्रकार ये 88 ग्रहों के नाम हैं।<BR><strong>नोट</strong>—ब्रैकेट में दिए गए नाम  त्रिलोक सार की अपेक्षा है। नं.17; 26; 38; 39; 44; 51; 55; 75; 77 ये नौ नाम  त्रिलोकसार    में नहीं हैं। इनके स्थान पर अन्य नौ नाम दिये हैं–अश्वस्थान; धूम; अक्ष;  चतुपाद; वस्तून; त्रस्त; एकजटी; श्रवण; ( त्रिलोकसार/363-370 ) </li>
</ol>
</ol>
<ul>
<ul>
Line 9: Line 9:


<noinclude>
<noinclude>
[[ ग्रन्थिम | पूर्व पृष्ठ ]]
[[ ग्रंथिम | पूर्व पृष्ठ ]]


[[ ग्रहण | अगला पृष्ठ ]]
[[ ग्रहण | अगला पृष्ठ ]]
Line 22: Line 22:


<noinclude>
<noinclude>
[[ ग्रन्थिम | पूर्व पृष्ठ ]]
[[ ग्रंथिम | पूर्व पृष्ठ ]]


[[ ग्रहण | अगला पृष्ठ ]]
[[ ग्रहण | अगला पृष्ठ ]]

Revision as of 16:22, 19 August 2020

== सिद्धांतकोष से ==

  1. अठासी ग्रहों का नाम निर्देश
    तिलोयपण्णत्ति/7/15-22 का भाषार्थ—1. बुध; 2. शुक्र; 3. वृहस्पति; 4. मंगल; 5. शनि; 6. काल; 7. लोहित; 8.कनक; 9. नील; 10. विकाल; 11. केश (कोश); 12. कवयव (कचयव); 13. कनक-संस्थान; 14. दुंदुभक (दुंदुभि); 15. रक्तनिभ; 16.नीलाभास; 17. अशोक संस्थान; 18. कंस; 19. रूपनिभ (रूपनिर्भास); 20. कंसकवर्ण (कंसवर्ण); 21. शंखपरिणाम; 22. तिलपुच्छ: 23. शंखवर्ण; 24. उदकवर्ण (उदय); 25. पंचवर्ण; 26. उत्पात; 27. धूमकेतु; 28. तिल; 29. नभ; 30. क्षारराशि; 31. विजिष्णु (विजयिष्णु); 32. सदृश; 33. संधि (शांति); 34. कलेवर; 35. अभिन्न (अभिन्न संधि); 36. ग्रंथि; 37. मानवक (मान); 38. कालक; 39. कालकेतु; 40. निलय; 41. अनय; 42. विद्युज्जिहृ; 43. सिंह; 44. अलक; 45. निर्दु:ख; 46. काल; 47. महाकाल; 48. रुद्र; 49. महारुद्र; 50. संतान; 51. विपुल; 52. संभव; 53. स्वार्थी; 54. क्षेम (क्षेमंकर); 55. चंद्र; 56. निर्मंत्र; 57. ज्यातिष्माण; 58. दिशसंस्थित (दिशा); 59. विरत (विरज); 60. वीतशोक; 61. निश्चल; 62. प्रलंब; 63. भासुर; 64. स्वयंप्रभ; 65. विजय; 66. वैजयंत; 67. सीमंकर; 68. अपराजित; 69. जयंत; 70. विमल; 71. अभयंकर; 72. विकस; 73. काष्ठी (करिकाष्ठ); 74. विकट; 75. कज्जलो; 76. अग्निज्वाल; 77. अशोक; 78. केतु; 79. क्षीररस; 80. अघ; 81. श्रवण; 82. जलकेतु; 83. केतु (राहु); 84. अंतरद; 85. एकसंस्थान; 86. अश्व; 87. भावग्रह; 88. महाग्रह, इस प्रकार ये 88 ग्रहों के नाम हैं।
    नोट—ब्रैकेट में दिए गए नाम त्रिलोक सार की अपेक्षा है। नं.17; 26; 38; 39; 44; 51; 55; 75; 77 ये नौ नाम त्रिलोकसार में नहीं हैं। इनके स्थान पर अन्य नौ नाम दिये हैं–अश्वस्थान; धूम; अक्ष; चतुपाद; वस्तून; त्रस्त; एकजटी; श्रवण; ( त्रिलोकसार/363-370 )
  • ग्रहों की संख्या व उनका लोक में अवस्थान—(देखें ज्योतिष देव - 2)।

 


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

ज्योतिष्क देव । महापुराण 3.84


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=ग्रह&oldid=58273"
Categories:
  • ग
  • पुराण-कोष
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 19 August 2020, at 16:22.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki