• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

धारिणी: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 21:42, 5 July 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Revision as of 16:26, 19 August 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
Newer edit →
Line 12: Line 12:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
  <p id="1">(1) सर्वहिकारितणी एक औषध-विद्या । यह मन्त्रों से परिष्कृत होती है । घरणेन्द्र ने यह विद्या नमि और विनमि को दी थी । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 22.68-73 </span></p>
  <p id="1">(1) सर्वहिकारितणी एक औषध-विद्या । यह मंत्रों से परिष्कृत होती है । घरणेंद्र ने यह विद्या नमि और विनमि को दी थी । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 22.68-73 </span></p>
<p id="2">(2) पश्चिम पुष्करार्ध के पश्चिम विदेह क्षेत्र मे विजयार्ध की उत्तरश्रेणी में गण्यपुर नगर के राजा सूर्याभ की रानी । यह चिन्तागति मनोगति, और चपलगति विद्याधरों की जननी थी । <span class="GRef"> महापुराण 70. 27-30,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 34.15-17 </span></p>
<p id="2">(2) पश्चिम पुष्करार्ध के पश्चिम विदेह क्षेत्र मे विजयार्ध की उत्तरश्रेणी में गण्यपुर नगर के राजा सूर्याभ की रानी । यह चिंतागति मनोगति, और चपलगति विद्याधरों की जननी थी । <span class="GRef"> महापुराण 70. 27-30,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 34.15-17 </span></p>
<p id="3">(3) अयोध्या नगरी के समुद्रदत्त सेठ की स्त्री, पूर्णभद्र और मणिभद्र की जननी । <span class="GRef"> पद्मपुराण 109.129-130,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 43. 148-149  </span></p>
<p id="3">(3) अयोध्या नगरी के समुद्रदत्त सेठ की स्त्री, पूर्णभद्र और मणिभद्र की जननी । <span class="GRef"> पद्मपुराण 109.129-130,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 43. 148-149  </span></p>
<p id="4">(4) मेरुदत्त श्रेष्ठी की भार्या । <span class="GRef"> महापुराण 46.112 </span></p>
<p id="4">(4) मेरुदत्त श्रेष्ठी की भार्या । <span class="GRef"> महापुराण 46.112 </span></p>
<p id="5">(5) महापुर नगर के मेरु सेठ की स्त्री, पद्म-रुचि की जननी । इसके पुत्र ने एक मरते हुए बैल को णमोकार मन्त्र सुनाया था जिसके फलस्वरूप वह मरकर महापुर में ही राजा छत्रच्छाय का वृषभध्वज नाम का पुत्र हुआ । <span class="GRef"> पद्मपुराण 106.38-43, 48 </span></p>
<p id="5">(5) महापुर नगर के मेरु सेठ की स्त्री, पद्म-रुचि की जननी । इसके पुत्र ने एक मरते हुए बैल को णमोकार मंत्र सुनाया था जिसके फलस्वरूप वह मरकर महापुर में ही राजा छत्रच्छाय का वृषभध्वज नाम का पुत्र हुआ । <span class="GRef"> पद्मपुराण 106.38-43, 48 </span></p>
<p id="6">(6) पद्मिनी नगरी के राजा विजयपर्वत की रानी । <span class="GRef"> पद्मपुराण 39.84 </span></p>
<p id="6">(6) पद्मिनी नगरी के राजा विजयपर्वत की रानी । <span class="GRef"> पद्मपुराण 39.84 </span></p>
<p id="7">(7) चक्रवर्ती भरतेश की रानी, पुरूरवा भील के जीव मरीचि की जननी । <span class="GRef"> वीरवर्द्धमान चरित्र 2.64-69 </span></p>
<p id="7">(7) चक्रवर्ती भरतेश की रानी, पुरूरवा भील के जीव मरीचि की जननी । <span class="GRef"> वीरवर्द्धमान चरित्र 2.64-69 </span></p>
<p id="8">(8) हरिवंशी राजा सूरसेन के पुत्र राजा वीर की रानी, अन्धकवृष्टि और नरवृष्टि की जननी । <span class="GRef"> महापुराण 70.92-94 </span></p>
<p id="8">(8) हरिवंशी राजा सूरसेन के पुत्र राजा वीर की रानी, अंधकवृष्टि और नरवृष्टि की जननी । <span class="GRef"> महापुराण 70.92-94 </span></p>
<p id="9">(9) रक्तद्वीप के मनुजोदय पर्वत पर स्थित रमणीक नगर निवासी विद्याधर गरुडवेग की पत्नी, गन्धर्वदत्ता की जननी । <span class="GRef"> महापुराण 75. 302-304 </span></p>
<p id="9">(9) रक्तद्वीप के मनुजोदय पर्वत पर स्थित रमणीक नगर निवासी विद्याधर गरुडवेग की पत्नी, गंधर्वदत्ता की जननी । <span class="GRef"> महापुराण 75. 302-304 </span></p>
<p id="10">(10) विजयार्ध की अलका नगरी के राजा हरिबल की प्रथम रानी, भीमक की जननी । <span class="GRef"> महापुराण 76.262-264 </span></p>
<p id="10">(10) विजयार्ध की अलका नगरी के राजा हरिबल की प्रथम रानी, भीमक की जननी । <span class="GRef"> महापुराण 76.262-264 </span></p>
<p id="11">(11) पुण्डरीकिणी नगरी के राजा सुरदेव की रानी । यह मरकर अच्युत स्वर्ग के प्रतीन्द्र की देवी हुई । <span class="GRef"> महापुराण 46. 352 </span></p>
<p id="11">(11) पुंडरीकिणी नगरी के राजा सुरदेव की रानी । यह मरकर अच्युत स्वर्ग के प्रतींद्र की देवी हुई । <span class="GRef"> महापुराण 46. 352 </span></p>
   
   



Revision as of 16:26, 19 August 2020

== सिद्धांतकोष से == एक औषध विद्या‒देखें विद्या ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) सर्वहिकारितणी एक औषध-विद्या । यह मंत्रों से परिष्कृत होती है । घरणेंद्र ने यह विद्या नमि और विनमि को दी थी । हरिवंशपुराण 22.68-73

(2) पश्चिम पुष्करार्ध के पश्चिम विदेह क्षेत्र मे विजयार्ध की उत्तरश्रेणी में गण्यपुर नगर के राजा सूर्याभ की रानी । यह चिंतागति मनोगति, और चपलगति विद्याधरों की जननी थी । महापुराण 70. 27-30, हरिवंशपुराण 34.15-17

(3) अयोध्या नगरी के समुद्रदत्त सेठ की स्त्री, पूर्णभद्र और मणिभद्र की जननी । पद्मपुराण 109.129-130, हरिवंशपुराण 43. 148-149

(4) मेरुदत्त श्रेष्ठी की भार्या । महापुराण 46.112

(5) महापुर नगर के मेरु सेठ की स्त्री, पद्म-रुचि की जननी । इसके पुत्र ने एक मरते हुए बैल को णमोकार मंत्र सुनाया था जिसके फलस्वरूप वह मरकर महापुर में ही राजा छत्रच्छाय का वृषभध्वज नाम का पुत्र हुआ । पद्मपुराण 106.38-43, 48

(6) पद्मिनी नगरी के राजा विजयपर्वत की रानी । पद्मपुराण 39.84

(7) चक्रवर्ती भरतेश की रानी, पुरूरवा भील के जीव मरीचि की जननी । वीरवर्द्धमान चरित्र 2.64-69

(8) हरिवंशी राजा सूरसेन के पुत्र राजा वीर की रानी, अंधकवृष्टि और नरवृष्टि की जननी । महापुराण 70.92-94

(9) रक्तद्वीप के मनुजोदय पर्वत पर स्थित रमणीक नगर निवासी विद्याधर गरुडवेग की पत्नी, गंधर्वदत्ता की जननी । महापुराण 75. 302-304

(10) विजयार्ध की अलका नगरी के राजा हरिबल की प्रथम रानी, भीमक की जननी । महापुराण 76.262-264

(11) पुंडरीकिणी नगरी के राजा सुरदेव की रानी । यह मरकर अच्युत स्वर्ग के प्रतींद्र की देवी हुई । महापुराण 46. 352


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=धारिणी&oldid=60333"
Categories:
  • ध
  • पुराण-कोष
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 19 August 2020, at 16:26.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki