• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

वसुनंदि: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 16:34, 19 August 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Revision as of 08:57, 16 September 2022 (view source)
Rahul (talk | contribs)
mNo edit summary
Newer edit →
Line 2: Line 2:
   <li> नंदिसंघ बलात्कार गण की गुर्वावली के अनुसार आप  सिंहनंदिके के शिष्य तथा वीरनंदि के गुरु थे। समय - विक्रम शक सं.525-531  (ई.603-609) (देखें [[ इतिहास#7.2 | इतिहास - 7.2]])। </li>
   <li> नंदिसंघ बलात्कार गण की गुर्वावली के अनुसार आप  सिंहनंदिके के शिष्य तथा वीरनंदि के गुरु थे। समय - विक्रम शक सं.525-531  (ई.603-609) (देखें [[ इतिहास#7.2 | इतिहास - 7.2]])। </li>
   <li> नंदिसंघ के देशीयगण की गुर्वाबली के अनुसार  देवेंद्राचार्य के शिष्य और सर्वचंद्र के गुरु थे। समय - वि.950-980  (ई.893-923)। - देखें [[ इतिहास#7.5  | इतिहास - 7.5 ]]</li>
   <li> नंदिसंघ के देशीयगण की गुर्वाबली के अनुसार  देवेंद्राचार्य के शिष्य और सर्वचंद्र के गुरु थे। समय - वि.950-980  (ई.893-923)। - देखें [[ इतिहास#7.5  | इतिहास - 7.5 ]]</li>
   <li> नंदिसंघ देशीयगण के आचार्य। अपर नाम जयसेन।  गुरु परंपरा-श्रीनंदि,  नयनंदि  (वि.1100)। नेमिचंद्र सैद्धांतिक,  वसुनब्दि ।  कृतियें - श्रावकाचार,  प्रतिष्ठासार  संग्रह,  मूलाचार वृत्ति, वस्तु विद्या, जिनशतक, आप्त मीमांस वृत्ति । समय - लगभग वि.1150 (ई.1068-1118)।  (ती./3/223,  226), (देखें [[ इतिहास#7.5 | इतिहास - 7.5]])। </li>
   <li> नंदिसंघ देशीयगण के आचार्य। अपर नाम जयसेन।  गुरु परंपरा-श्रीनंदि,  नयनंदि  (वि.1100)। नेमिचंद्र सैद्धांतिक,  वसुनब्दि ।  कृतियें - श्रावकाचार,  प्रतिष्ठासार  संग्रह,  मूलाचार वृत्ति, वस्तु विद्या, जिनशतक, आप्त मीमांस वृत्ति । समय - लगभग वि.1150 (ई.1068-1118)।  (<span class="GRef"> ती./3/223,  226 </span>), (देखें [[ इतिहास#7.5 | इतिहास - 7.5]])। </li>
</ol>
</ol>


Line 12: Line 12:
</noinclude>
</noinclude>
[[Category: व]]
[[Category: व]]
[[Category: इतिहास]]

Revision as of 08:57, 16 September 2022



  1. नंदिसंघ बलात्कार गण की गुर्वावली के अनुसार आप सिंहनंदिके के शिष्य तथा वीरनंदि के गुरु थे। समय - विक्रम शक सं.525-531 (ई.603-609) (देखें इतिहास - 7.2)।
  2. नंदिसंघ के देशीयगण की गुर्वाबली के अनुसार देवेंद्राचार्य के शिष्य और सर्वचंद्र के गुरु थे। समय - वि.950-980 (ई.893-923)। - देखें इतिहास - 7.5
  3. नंदिसंघ देशीयगण के आचार्य। अपर नाम जयसेन। गुरु परंपरा-श्रीनंदि, नयनंदि (वि.1100)। नेमिचंद्र सैद्धांतिक, वसुनब्दि । कृतियें - श्रावकाचार, प्रतिष्ठासार संग्रह, मूलाचार वृत्ति, वस्तु विद्या, जिनशतक, आप्त मीमांस वृत्ति । समय - लगभग वि.1150 (ई.1068-1118)। ( ती./3/223, 226 ), (देखें इतिहास - 7.5)।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=वसुनंदि&oldid=96287"
Categories:
  • व
  • इतिहास
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 16 September 2022, at 08:57.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki