तीव्र का लक्षण
From जैनकोष
ध.११/४,२,६,२४६/३४९/१३ तिव्व-मंददा णाम तेसिं जहण्णुक्कस्सपरिणामाणमविभागपडिच्छेदाणमप्पाबहुगं परूवेदि। =तीव्र-मन्दता अनुयोग द्वार उन (स्थितिबन्धाध्यवसायस्थानों) के जघन्य व उत्कृष्ट परिणामों के अविभाग प्रतिच्छेदों के अल्पबहुत्व की प्ररूपणा करता है।